Violent Protest: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार में JPL कोयला खदान की जनसुनवाई के खिलाफ धरने पर बैठे ग्रामीणों ने पुलिस की दखलअंदाजी के चलते अपना आपा खो दिया। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई दिनों से शांतिपूर्वक धरने पर बैठे थे, ऐसे में पुलिस को बीच में आकर उनकी स्थिति समझने के बजाय कठोर शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए था, जिससे उनका आक्रोश भड़क उठा।
कैसे शुरू हुआ यह सब
दरअसल, यह मामला 8 दिसंबर 2025 को धोराभाटा में हुई जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है। JPL कोयला खदान सेक्टर-1 कोल ब्लॉक से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण भाई-बहन 12 दिसंबर से धरने पर बैठे हुए हैं। लंबे समय से परेशान ग्रामीणों ने शनिवार को तब अपना आपा खो दिया, जब पुलिस प्रशासन और थाना प्रभारी कमला पुशाम ठाकुर के नेतृत्व में पुलिसकर्मी भीड़ को हटाने पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने और इलाके में तनाव का माहौल बन गया। बता दें कि यह तनाव अभी भी जारी है।

Violent Protest: आक्रोश की चिंगारी वाहनों पर बरसी
ग्रामीणों का आक्रोश इतना बढ़ गया कि उन्होंने मौके पर खड़ी पुलिस बस, जीप और एंबुलेंस में आग लगा दी। इसके अलावा कई अन्य सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इस घटना से तमनार में तनाव और बढ़ गया। यही नहीं, कई पुलिस कर्मियों को पत्थरबाजी का भी सामना करना पड़ा, जिसमें कई पुलिस कर्मचारी घायल हो गए।
थाना प्रभारी हुईं जख्मी
इस विरोध प्रदर्शन में कई ग्रामीण महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्हें रोकने की कोशिश के दौरान थाना प्रभारी कमला पुशाम ठाकुर जख्मी हो गईं। भीड़ को काबू में करने के प्रयास में उन्हें महिलाओं की ओर से लात भी मारी गई।
Written by- Adarsh Kathane







