West bengal: मतदाता सूची में अपना अस्तित्व साबित करने के लिए लोगों को सुनवाई केंद्रों तक पहुंचना पड़ रहा है। इसी बीच दुर्गापुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कड़ाके की ठंड में बुजुर्ग महिला को लाया गया केंद्र
दुर्गापुर इस्पात नगरी के जयदेव रोड की निवासी 75 वर्षीय एक बीमार बुजुर्ग महिला को कड़ाके की ठंड में सुनवाई केंद्र तक लाया गया। हालत यह थी कि वह ठीक से चल तो दूर, खड़ी होने में भी असमर्थ थीं। झुकी हुई कमर और कमजोर शरीर के साथ उन्हें अपने दामाद के कंधे का सहारा लेकर सुनवाई केंद्र पहुंचना पड़ा।
West bengal: वर्षों से इसी बूथ पर करती आ रही हैं मतदान
बताया जा रहा है कि यह बुजुर्ग महिला वर्षों से दुर्गापुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के 119 नंबर बूथ पर नियमित रूप से मतदान करती आ रही हैं। लेकिन अचानक उन्हें यह कहकर सुनवाई के लिए बुलाया गया कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज नहीं है।
परिवार ने बताया अमानवीय रवैया
परिवार ने इस पूरे मामले को चुनाव आयोग की घोर लापरवाही और अमानवीय रवैया बताया है। बुजुर्ग महिला के दामाद अरुण चट्टराज ने कहा कि उनकी सास चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं और वर्षों से इसी इलाके में मतदान कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया, जो बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने इस परेशानी के लिए चुनाव आयोग को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया।
West bengal: मंत्री प्रदीप मजूमदार का चुनाव आयोग पर कटाक्ष
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री प्रदीप मजूमदार ने चुनाव आयोग पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को भी सुनवाई केंद्रों पर बुलाया जा रहा है। उनका आरोप है कि मतदाताओं के नाम काटने की साजिश की जा रही है।
भाजपा ने आयोग से जवाब मांगने की बात कही
West bengal: वहीं भाजपा के तीन नंबर मंडल अध्यक्ष बुद्धदेव मंडल ने कहा कि चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि शारीरिक रूप से अक्षम मतदाताओं की सुनवाई उनके घर जाकर की जाएगी। इसके बावजूद बुजुर्ग महिला को केंद्र पर बुलाया जाना गंभीर मामला है और इस पर आयोग से जवाब मांगा जाएगा।
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