West Bengal: पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों को लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (डीए) मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। शीर्ष अदालत के आदेश के बाद राज्य सरकार के कर्मचारियों के संयुक्त मंच और विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों ने फैसले का स्वागत किया और इसे कर्मचारियों के अधिकारों की जीत बताया।
कर्मचारियों ने फैसले को बताया आंदोलन की जीत
राज्य सरकार के कर्मचारियों के संयुक्त मंच के संयोजक भास्कर घोष ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि यह 1,100 दिनों से अधिक चले आंदोलन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार को कर्मचारियों का बकाया डीए देना ही होगा। घोष ने आंदोलन में सहयोग देने वाले वकीलों, संगठनों और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी का आभार भी जताया।
West Bengal: सुप्रीम कोर्ट का आदेश और अगली प्रक्रिया
गुरुवार को जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह 31 मार्च तक बकाया डीए का 25 प्रतिशत भुगतान करे। इसके साथ ही शेष 75 प्रतिशत डीए के भुगतान पर निर्णय के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने का भी आदेश दिया गया। इससे पहले अदालत ने मई 2024 में भी अंतरिम आदेश जारी किया था।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया, टीएमसी ने बताया आंशिक जीत
नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने फैसले को कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों की जीत बताया। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार, वाम नेता विकास भट्टाचार्य और कांग्रेस नेताओं ने भी फैसले का स्वागत किया। वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इसे राज्य सरकार की आंशिक जीत बताते हुए कहा कि अदालत ने 100 प्रतिशत डीए का आदेश नहीं दिया है।







