World War 3: अमेरिका के राष्ट्पति के शांति के बहुत सारे प्रयास असफल होते जा रहे हैं। अब ट्ंप को लगता है दुनिया में एक मत होना असंभव है। इसके कारण हैं यूक्रेन और रूस के युद्ध में यूरोपीय देशों का तनाव! यूक्रेन को नाटो देशों में मिलाने के प्रयास लगातार चल रहे हैं। लेकिन रूस नहीं चाहता है कि नाटो का विस्तार हो। उससे रूस की शक्ति में बदलाव आ सकता है। इसी कारण एक दूसरे पर यूक्रेन रूस बमों की बौछार कर रहे हैं। यह भी अमेरिका का मानना है कि सिर्फ नवंबर के महीने 25 हजार लोग मारे गये हैं। अमेरिका का रूस पर दबाव है कि उसका व्यापार यूरोप के साथ नही चले, यानी आर्थिक रूप से सैंक्शन बहुत सारे लगाये जा चुके हैं। अमेरिका का यूरोप पर भी दबाव है कि वह रूस के तेल को न खरीदें।
घटनाएं तनाव की हो रही हैं। पश्चिम एशिया में इजरायल अधिकांश मुश्लिम देशों का शत्रु बना बैठा है। मुस्लिम देश इजरायल को तब से सहन नही ंकर पा रहें हैं, जब से इसका निर्माण हुआ। देशों के बीच समीकरण ऐसे हैं कि अमेरिका दोनें युद्वों में बीच अपनी परोक्ष भूमिका निभा रहा है। इजरायल और यूक्रेन की पीठ थपथपाने में सक्रिय है, इसी के कारण यह दोनों युद्ध विश्व युद्ध की आंशिक भूमिका निभा रहे हैं।
इस प्रसंग में अमेरिकी रा्ष्ट्पति का आज का बयान तीसरे विश्व युद्ध की आहट को बता रहा है। दुनिया में परमाणु अस्त्रों के इस्तेमाल को रोकने की बहुत सारी संधियां हो चुकी हैं, पर जिस तरह से रूस, यूक्रेन और इजरायल-फिलिस्तीन बमबारी करने में नहीं हिचकिचा रहे हैं। नागरिकों को मारने से परहेज नहीं कर रहे हैं। नगरों को तबाह करने में एकदूसरे से बढ़चढ़कर बमों से हवाई लड़ाई को अंजाम दे रहे हैं, तब शांति की बात करने का वातावरण नहीं बन पा रहा है। यदि तीसरा विश्वयुद्ध वास्तव में होता है, तब पृथ्वी पर कोई प्राणि जिंदा रहेगा, वह नामुमकिन होगा। परमाएाु अस्त्रों से परहेज होना चाहिए। यदि नहीं होगा, तब जीवन समाप्त होने की ओर होगा।
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