Yamuna Expressway Accident: जिस तरह नदी में बहते पानी की गहराई को नापा नहीं जा सकता, उसी तरह एक मां के दिल में बसे प्यार और ममता को किसी पैमाने में नहीं तोला जा सकता। मां की ममता वह शक्ति है, जो मौत के सामने भी कमजोर नहीं पड़ती और उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुए यमुना एक्सप्रेसवे हादसे ने इस सच्चाई को एक बार फिर साबित कर दिया।
यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा
याद हो कि बीते मंगलवार को घने कोहरे के कारण यमुना एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसमें सात बसें और तीन कारें आपस में टकरा गईं। टक्कर इतनी भीषण थी कि कुछ देर बाद कई वाहनों में आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 96 लोग घायल बताए जा रहे हैं। लेकिन इस त्रासदी के बीच इंसानियत और ममता की एक ऐसी कहानी सामने आई, जिसने हर आंखों में आंसू ला दिए। दरअसल, हमीरपुर के राठ की रहने वाली 42 वर्षीय पार्वती अपने दो बच्चों प्राची और सनी के साथ नोएडा से अपने पति गोविंद के पास लौट रही थीं। तभी अचानक बस में आग भड़क उठी और चीख-पुकार मच गई।
Yamuna Expressway Accident: मां का बलिदान हमेशा दिलों में जिंदा रहेगा
मौत सामने खड़ी थी, लेकिन एक मां के लिए उस पल सबसे पहले उसके बच्चे थे। पार्वती ने अपनी जान की परवाह किए बिना बस का कांच तोड़ा और अपने दोनों बच्चों को बाहर निकाल दिया। मां की ममता ने बच्चों को जीवन दे दिया, लेकिन उसी ममता की कीमत पार्वती को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। आज प्राची और सनी ज़िंदा हैं, क्योंकि उनकी मां ने अपनी सांसों को दांव पर लगाकर उन्हें बचा लिया। पार्वती भले ही इस दुनिया में नहीं रहीं, लेकिन उनकी ममता, उनका साहस और उनका बलिदान हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। घटना को लेकर पार्वती के देवर गुलजारी का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित निकालते वक्त पार्वती का गला कांच में फंस गया था। जिसके चलते वह खुद को जलती बस से बाहर नहीं निकाल सकी और अंदर ही फँस गईं।
Yamuna Expressway: मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री ने जताया शोक
वहीं इस भयानक हादसे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख जताते हुए जिला प्रशासन को घायलों के समुचित इलाज के निर्देश दिए। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की।
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