Shimla Ugc Protest: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर 22 अक्टूबर 2026 को विरोध प्रदर्शन हुआ। राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी (RDP) और राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ता सचिवालय के बाहर जुटे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय की ओर जाने वाले बैरिकेडिंग वाले गेट को खोलने की कोशिश की। इस घटना के बाद UGC के नियमों को लेकर विवाद फिर चर्चा में आ गया।
शिमला में UGC नियमों के खिलाफ प्रदर्शन क्यों हुआ?
UGC के नए नियमों का विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि इन प्रावधानों से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को परेशानी हो सकती है। प्रदर्शनकारियों ने नियमों में झूठी शिकायतों से बचाव और निष्पक्ष जांच की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की आशंका जताई। इसी आधार पर उन्होंने नियमों को वापस लेने की मांग की। हालांकि, ये प्रदर्शनकारी संगठनों की आशंकाएं हैं, दुरुपयोग का प्रमाण नहीं।
Shimla Ugc Protest: मनाली से शुरू हुई विरोध यात्रा शिमला कैसे पहुंची?
राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी के अध्यक्ष रुमित सिंह ठाकुर के नेतृत्व में 2 अक्टूबर को मनाली से विरोध यात्रा शुरू की गई थी। 22 अक्टूबर को यह यात्रा शिमला पहुंची। इसमें राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना भी शामिल हुए। यात्रा के जरिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में UGC के नए नियमों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया।
सचिवालय के बाहर कैसे बिगड़े हालात?
प्रदर्शनकारी सर्कुलर रोड पर बैरिकेडिंग वाले गेट को खोलकर सचिवालय की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और बाद में हल्का बल प्रयोग भी किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और सचिवालय के मुख्य द्वार के बाहर धरने पर बैठ गए।
Shimla Ugc Protest: UGC के नए नियमों पर क्या है विवाद?
UGC ने 13 जनवरी 2026 को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने और जाति आधारित भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए नए नियम अधिसूचित किए थे। इनके तहत शैक्षणिक संस्थानों में समान अवसर केंद्र और शिकायतों से निपटने के लिए विशेष व्यवस्था का प्रावधान किया गया। नियमों के विरोधियों ने शिकायतों की परिभाषा, उनके दुरुपयोग की आशंका और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। दूसरी ओर, नियमों के समर्थकों का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने और प्रभावित विद्यार्थियों को शिकायत का प्रभावी रास्ता देने के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है।
प्रदर्शनकारियों की मांग क्या है और आगे क्या होगा?
शिमला में प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने UGC के नए नियमों को पूरी तरह वापस लेने की मांग की। उन्होंने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपने और 10 जनवरी को दिल्ली पहुंचकर विरोध दर्ज कराने की योजना भी बताई।इस विवाद में एक तरफ भेदभाव रोकने और विद्यार्थियों को समान अवसर देने का सवाल है, तो दूसरी तरफ शिकायतों की निष्पक्ष जांच और उनके संभावित दुरुपयोग से सुरक्षा की मांग उठ रही है। नियमों को लेकर आगे क्या फैसला होगा, यह संबंधित पक्षों की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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