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8 साल के बच्चे ने 6 साल की बच्ची पर ईंट से किए कई वार, आखिर इतनी छोटी उम्र में क्यों बढ़ रहा है गुस्सा?

बच्चों में क्यों बढ़ रही है हिंसक प्रवृत्ति?
बच्चों में क्यों बढ़ रही है हिंसक प्रवृत्ति?

Child Psychology: हरियाणा के पंचकूला में एक 8 साल के बच्चे ने स्कूल के क्लासरूम में 6 साल की बच्ची पर जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना का 59 सेकेंड का वीडियो सामने आया है, जो इतना भयावह है कि इसे दिखाना संभव नहीं है। वीडियो में बच्चा भारी ईंट और पैरों से बच्ची पर लगातार हमला करता दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों से जुड़े ऐसे कई गंभीर मामले सामने आ चुके हैं।आखिर छोटी-छोटी बातों पर बच्चों में इतना गुस्सा क्यों बढ़ रहा है? किसी पर जानलेवा हमला करते समय उनके मन में क्या चल रहा होता है? क्या इसके पीछे मोबाइल, हिंसक वीडियो और मानसिक तनाव जैसी वजहें हैं? साथ ही, पंचकूला के इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी? आइए, इस एक्सप्लेनर में इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं।

Child Psychology: बच्ची पर हमले की क्या वजह सामने आई?

यह घटना 28 अक्टूबर को हरियाणा के पंचकूला स्थित शहीद मेजर अनुज राजपूत राजकीय संस्कृति मॉडल स्कूल में हुई। आरोपी बच्चा तीसरी कक्षा में पढ़ता है, जबकि पीड़ित बच्ची केजी की छात्रा है। 31 अक्टूबर को बच्ची के माता-पिता के साथ आए एक व्यक्ति ने बताया कि शुरुआत में आरोपी छात्र ने बच्ची के साथ कुछ शरारत की थी। इससे परेशान होकर बच्ची ने उसे पागल कह दिया और शिक्षकों से शिकायत करने की बात कही।कुछ समय बाद आरोपी बच्चा उसके पास पहुंचा और कहा कि उसके पिता उसे ऊपर वाले कमरे में बुला रहे हैं। बच्ची ने उसकी बात पर भरोसा किया और उसके साथ स्कूल की पहली मंजिल पर बने एक क्लासरूम में चली गई। वहां पहुंचने के बाद बच्चे ने उस पर बेरहमी से हमला कर दिया। पुलिस पूछताछ में भी आरोपी छात्र ने बताया कि बच्ची ने उसे पागल कहा था, जिसके बाद उसने उसके साथ मारपीट की।आरोपी बच्चे के व्यवहार को लेकर पहले भी दूसरे छात्र शिकायत कर चुके थे। इस बारे में शिक्षकों ने उसके माता-पिता को चेतावनी भी दी थी। बताया गया है कि 8 साल के बच्चे के व्यवहार को लेकर पहले भी शिकायतें मिली थीं और उसे सुधारने के लिए परिजनों को समझाया गया था।

करीब दो घंटे तक कमरे में पड़ी रही बच्ची

घटना के बाद जब बच्ची को घर ले जाने के लिए ऑटो चालक स्कूल पहुंचा, तो उसे बच्ची नहीं मिली। इसके बाद उसके माता-पिता स्कूल पहुंचे और शिक्षकों से बच्ची के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। बच्ची के चाचा के मुताबिक, हमला करने वाला छात्र उस समय पार्क में खेल रहा था। उसी ने बताया कि बच्ची ऊपर कमरे में है और किसी ने उसे मारा है।बच्ची के माता-पिता का आरोप है कि जिस कमरे में बच्ची थी, उस पर ताला लगा हुआ था और वह करीब दो घंटे तक वहीं पड़ी रही। परिजन पहले बच्ची को सिविल अस्पताल लेकर गए। इसके बाद उसे चंडीगढ़ के पीजीआई में भर्ती कराया गया। फिलहाल बच्ची को होश आ गया है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। हमले में उसकी नाक की हड्डी टूट गई है।

Child Psychology: बच्चों में हिंसा की क्या वजह है?
पंचकूला हमला: बच्चों में हिंसा की क्या वजह है?
Child Psychology: छोटी सी बात पर बच्चा जानलेवा हमला करने पर क्यों उतारू हुआ?

विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों में इस तरह के हिंसक व्यवहार के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें हो सकती हैं। इनमें मोबाइल पर हिंसक कंटेंट देखना और मानसिक तनाव या बचपन में झेले गए बुरे अनुभव शामिल हैं।

1. मोबाइल पर हिंसक वीडियो और खतरनाक ऑनलाइन गेम

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल की वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. रोमा कुमार के मुताबिक, छोटी उम्र में बच्चों के अंदर गुस्से पर काबू पाने, दूसरों की भावनाएं समझने और अपने व्यवहार को नियंत्रित करने की क्षमता धीरे-धीरे विकसित होती है। इस उम्र में सामान्य बातों पर गुस्सा आना असामान्य नहीं है। लेकिन अगर कोई बच्चा बहुत ज्यादा हिंसक व्यवहार करता है, तो इसकी एक वजह यह हो सकती है कि वह लगातार हिंसा देख रहा है और उसे सामान्य मानने लगा है।

चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. जितेंद्र पिपले का कहना है कि बच्चे के मानसिक विकास और व्यवहार से जुड़ी परेशानी के पीछे मोबाइल पर हिंसक वीडियो देखने की आदत हो सकती है। बच्चों को सही और गलत की समझ धीरे-धीरे आती है। ऐसे में अगर वे लगातार हिंसक वीडियो देखते हैं या हिंसा वाले ऑनलाइन गेम खेलते हैं, तो उनके लिए हिंसा सामान्य बात बन सकती है। इसका असर उनके व्यवहार पर पड़ता है और वे खुद भी हिंसक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।इसके अलावा सोशल मीडिया पर गैंग कल्चर भी बढ़ रहा है। किशोर अपराध और गैंगवार से जुड़े वीडियो साझा करके अपनी बहादुरी दिखाने की कोशिश करते हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर चलने वाले खतरनाक चैलेंज देखकर बच्चे भी जोखिम भरे काम करने लगते हैं।आरोपी छात्र के बारे में भी जानकारी सामने आई है कि उसकी दोस्ती घर के आसपास रहने वाले उससे अधिक उम्र के लड़कों से थी। वह उनके मोबाइल पर गेम खेलता था और सोशल मीडिया भी देखता था। इन लड़कों के साथ वह झगड़ों में भी शामिल होता था। बताया गया है कि उसे एक हिंसक ऑनलाइन गेम खेलने की भी आदत थी।

Child Psychology: हिंसक और अश्लील कंटेंट से जुड़े अन्य मामले

पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें हिंसक या अश्लील कंटेंट देखने के बाद बच्चों और किशोरों ने गंभीर अपराध किए।24 अप्रैल 2024 को मध्य प्रदेश में 13 साल के एक लड़के ने मोबाइल पर अश्लील वीडियो देखने के बाद अपनी 9 साल की बहन के साथ दुष्कर्म किया। वहीं, जनवरी 2025 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बीके कंपनी नाम के गिरोह के 7 लोगों ने विट्ठल शिंदे नाम के एक नाबालिग की हत्या कर दी। इनमें 2 नाबालिग भी शामिल थे। आरोपियों ने हत्या का वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।इसी तरह, 26 फरवरी 2025 को चेन्नई में 6 नकाबपोश लड़कों ने 28 साल के एक हिस्ट्रीशीटर की हत्या कर दी। इसके बाद सोशल मीडिया पर लिखा गया कि रॉबर्ट 100% मर चुका है।

2. मानसिक तनाव और बचपन में झेला गया बुरा अनुभव

बच्चों के हिंसक व्यवहार की दूसरी वजह मानसिक तनाव, अवसाद या बचपन में झेली गई हिंसा और भेदभाव भी हो सकते हैं। अमेरिकी समाजशास्त्री रॉबर्ट मार्टिन की स्ट्रेन थ्योरी के मुताबिक, जब बच्चों को अपनी पसंद की चीज या मनचाहा लक्ष्य नहीं मिलता, तो उनके अंदर मानसिक दबाव, गुस्सा और निराशा बढ़ सकती है। कुछ बच्चे इसी स्थिति में गलत कदम उठा लेते हैं।डॉ. रोमा कुमार के अनुसार, जब बच्चे अपने आसपास अपराध होते देखते हैं, तो उनके मन में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। इससे उनके अंदर भी अपराध करने की प्रवृत्ति बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा आपराधिक सोच रखने वाले दोस्तों की संगति और गरीबी के कारण पैदा होने वाला मानसिक तनाव भी बच्चों के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है।अगर किसी बच्चे ने बचपन में हिंसा या भेदभाव का सामना किया है, तो उसके मन में दूसरों पर नियंत्रण रखने या अपनी ताकत दिखाने की भावना विकसित हो सकती है। आगे चलकर यह व्यवहार गंभीर समस्या बन सकता है।मानसिक तनाव या अवसाद से गुजर रहे कुछ बच्चे अपने काम के परिणामों को समझे बिना अपराध कर बैठते हैं। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के मुताबिक, अपराध के मामलों में पकड़े गए 70% किशोरों को यह समझ नहीं थी कि उनके किए गए काम का क्या परिणाम हो सकता है।

Child Psychology: आरोपी बच्चे का भी होगा मेडिकल असेसमेंट

पंचकूला के डीसीपी (क्राइम) अमरिंदर सिंह ने बताया कि 7 से 12 साल की उम्र के बच्चों का मेडिकल असेसमेंट कराया जाता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि बच्चे को अपने किए गए काम और उसके परिणामों की समझ थी या नहीं। इस मामले में भी आरोपी बच्चे का मेडिकल असेसमेंट किया जा रहा है। इसके साथ ही उसके माता-पिता की पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है।

क्या आजकल बच्चों में गुस्सा और आपराधिक प्रवृत्ति बढ़ रही है?

इस सवाल पर केरलम की राजधानी तिरुवनंतपुरम के एसएटी अस्पताल की अगस्त 2026 में जारी एक स्टडी में अहम जानकारी सामने आई है। स्टडी के मुताबिक, पिछले 2 वर्षों में केरलम के बच्चों और किशोरों में आपराधिक प्रवृत्ति 50% से ज्यादा बढ़ी है। वहीं, 2019 से 2024 के बीच इसमें 66% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही स्कूलों में बच्चे अब एक-दूसरे से पहले के मुकाबले ज्यादा डरने लगे हैं।डॉ. जितेंद्र पिपले भी मानते हैं कि आजकल बच्चों के व्यवहार में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। उनमें गुस्से को सहन करने की क्षमता कम होती जा रही है। उनके मुताबिक, अब बच्चों के पास हर तरह का डिजिटल कंटेंट आसानी से उपलब्ध है। दूसरी तरफ माता-पिता भी इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि तेजी से बदलती दुनिया में बच्चों की परवरिश कैसे करें। ज्यादातर माता-पिता बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उपलब्ध हर तरह के कंटेंट से दूर रखने या उनके इस्तेमाल पर नियंत्रण करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं।

बच्चे ने बहन को अश्लील वीडियो दिखाए, टीचर की आपत्तिजनक तस्वीर बनाई।
बच्चे ने बहन को अश्लील वीडियो दिखाए, टीचर की आपत्तिजनक तस्वीर बनाई।
Child Psychology: बच्चों के व्यवहार को बेहतर बनाने के लिए माता-पिता क्या करें?

डॉ. रोमा कुमार और डॉ. जितेंद्र पिपले के मुताबिक, बच्चों के व्यवहार को समझने और उन्हें गलत रास्ते पर जाने से रोकने के लिए माता-पिता को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।मोबाइल और टीवी पर नजर रखें: माता-पिता को यह पता होना चाहिए कि उनके बच्चे मोबाइल और टीवी पर क्या देख रहे हैं। साथ ही यह भी समझने की कोशिश करनी चाहिए कि उस कंटेंट का उनके व्यवहार और सोच पर क्या असर पड़ रहा है।

बच्चों की संगति और बाहरी अनुभवों पर ध्यान दें: बच्चे घर के बाहर किन लोगों और दूसरे बच्चों के संपर्क में रहते हैं, इस पर नजर रखना जरूरी है। हालांकि, माता-पिता हर बाहरी व्यक्ति या बच्चे को नियंत्रित नहीं कर सकते। इसलिए यह जानने की कोशिश करें कि बच्चा बाहर से क्या सीखकर आ रहा है। अगर वह कुछ गलत सीख रहा है, तो उसे सही और गलत के बीच का अंतर समझाएं।दो साल से छोटे बच्चों को मोबाइल न दें: विशेषज्ञों के मुताबिक, 2 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल नहीं देना चाहिए। इसके बाद अगर माता-पिता चाहें, तो बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार कार्टून, कविताएं और पढ़ाई से जुड़ी शैक्षणिक वीडियो दिखा सकते हैं।

रील्स की जगह लंबे वीडियो दिखाएं: रील्स देखने से बच्चे बहुत कम समय में अलग-अलग तरह के हजारों कंटेंट के संपर्क में आ सकते हैं। इससे लंबे समय तक किसी एक काम पर ध्यान लगाने की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए बच्चों को लगातार रील्स दिखाने के बजाय एक ही विषय पर आधारित लंबे वीडियो दिखाना बेहतर है।पढ़ाई में एआई का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल न करें: बच्चों को पढ़ाई और होमवर्क के लिए एआई पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से उनकी खुद सोचने, समझने और समस्याओं का हल निकालने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे उनके मानसिक विकास पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।

Child Psychology: आरोपी छात्र के मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी?

इस मामले में 31 अक्टूबर को आरोपी बच्चे के खिलाफ बच्ची को गंभीर चोट पहुंचाने और उसे गलत तरीके से कमरे में बंद रखने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और किशोर न्याय अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में स्कूल के प्रिंसिपल, एक क्लास इंचार्ज और एक चौकीदार का नाम भी एफआईआर में शामिल किया गया है।जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी बच्चे को ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया है। वहां विशेषज्ञ उसका मेडिकल असेसमेंट कर रहे हैं। 4 नवंबर को बच्चे को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा।पंचकूला के डीसीपी क्राइम अमरिंदर सिंह के मुताबिक, भारतीय कानून के तहत 8 साल के बच्चे को सजा नहीं दी जा सकती और न ही उसे जेल भेजा जा सकता है। ऐसे मामलों में बच्चे को सुधारने और उसकी काउंसलिंग कराने पर ध्यान दिया जाता है।

Child Psychology: हरियाणा सरकार ने बनाई उच्चस्तरीय जांच कमेटी

हरियाणा सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया है। राज्य के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा है कि अगर मामले में किसी शिक्षक, प्रिंसिपल या स्कूल के दूसरे कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।इसके अलावा हरियाणा बाल अधिकार संरक्षण आयोग और मानवाधिकार आयोग भी इस मामले में सरकार को कार्रवाई करने की सिफारिश करेंगे।मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने बताया कि आयोग सरकार से स्कूलों में बच्चों की मानसिक स्थिति और सोच को समझने के लिए एक विशेष व्यवस्था बनाने की सिफारिश करेगा। इसका उद्देश्य बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को समय रहते पहचानना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है।