Assembly Election: नई दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दलों ने एक बड़ी रैली का आयोजन किया। इस दौरान विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर, ईवीएम और मतदाता सूची जैसे मुद्दों को उठाया। रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2024 के लोकसभा चुनाव को फर्जी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 के बाद पिछले दो वर्षों में कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में भी गड़बड़ी की गई है। राहुल गांधी ने इन चुनावों को रद्द कर दोबारा मतदान कराने की मांग की।
इससे पहले भी कांग्रेस के कई नेता पिछले दो वर्षों में हुए विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया पर सवाल उठा चुके हैं। हाल ही में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर पिछले दो वर्षों में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की थी। विपक्ष की इस मांग में मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव शामिल हैं। विपक्ष इन चुनावों को रद्द कराने के साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी कर रहा है।
Assembly Election: क्या चुनाव रद्द करने का प्रावधान है?
विपक्ष की लगातार उठ रही मांग के बीच सवाल यह है कि क्या किसी राज्य का विधानसभा चुनाव रद्द करके दोबारा कराया जा सकता है? भारत में चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। यदि किसी चुनाव में धांधली, भ्रष्टाचार, फर्जी मतदान, बूथ कैप्चरिंग या मतगणना में गंभीर गड़बड़ी सामने आती है, तो उसे कानूनी रूप से चुनौती दी जा सकती है। भारतीय संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में चुनाव को चुनौती देने और कुछ परिस्थितियों में उसे रद्द करने के प्रावधान मौजूद हैं।हालांकि, किसी राजनीतिक दल, उम्मीदवार या मतदाता की शिकायत मात्र से चुनाव रद्द नहीं किया जा सकता। इसके लिए कानून में तय प्रक्रिया का पालन करना और चुनाव में हुई गड़बड़ी के ठोस सबूत पेश करना जरूरी होता है।
संविधान का अनुच्छेद 329(बी) क्या कहता है?
संविधान के अनुच्छेद 329(बी) के अनुसार, संसद या किसी राज्य के विधानमंडल के चुनाव को अदालत में चुनौती देने के लिए चुनाव याचिका दाखिल करनी होती है। इसके लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित प्राधिकारी के नियमों का पालन करना अनिवार्य है। इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान बार-बार अदालत में याचिकाएं दाखिल करके मतदान या चुनाव की पूरी प्रक्रिया को बाधित न किया जा सके।
Assembly Election: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 80
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 80 में किसी चुनाव को चुनौती देने का कानूनी तरीका बताया गया है। इसके अनुसार, चुनाव को केवल चुनाव याचिका के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी उम्मीदवार को लगता है कि उसके निर्वाचन क्षेत्र में निष्पक्ष तरीके से चुनाव नहीं हुआ या चुनाव परिणाम में कानूनी गड़बड़ी हुई है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत चुनाव याचिका दाखिल कर सकता है। हालांकि, केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है। याचिकाकर्ता को यह बताना होगा कि चुनाव में किस तरह की कानूनी अनियमितता हुई और किस आधार पर परिणाम रद्द करने की मांग की जा रही है।
धारा 81 के तहत कौन दाखिल कर सकता है चुनाव याचिका?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 81 में चुनाव याचिका दाखिल करने के अधिकार और उसकी समयसीमा से जुड़े नियम बताए गए हैं। इसके तहत मुख्य रूप से दो श्रेणियों के लोगों को चुनाव याचिका दाखिल करने का अधिकार है। इनमें चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार और संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता शामिल हैं। यानी किसी चुनाव को कानूनी रूप से चुनौती देने के लिए कानून में तय पात्रता और समयसीमा का पालन करना जरूरी है।
Assembly Election: धारा 100 के तहत कब रद्द हो सकता है चुनाव?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 100 में उन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें किसी चुनाव को अमान्य घोषित किया जा सकता है। इस प्रावधान के तहत हाईकोर्ट को अधिकार है कि यदि चुनाव में कानून के अनुसार बताई गई गंभीर अनियमितताएं साबित हो जाती हैं, तो वह निर्वाचित उम्मीदवार के चुनाव को रद्द कर सकता है।
क्या सभी राज्यों में दोबारा चुनाव कराना संभव है?
विपक्ष की ओर से कई राज्यों के चुनाव रद्द करने की मांग की जा रही है, लेकिन केवल राजनीतिक मांग के आधार पर दोबारा चुनाव नहीं कराए जा सकते। इसके लिए चुनाव में हुई गंभीर गड़बड़ी को कानूनी प्रक्रिया के तहत साबित करना जरूरी है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को प्रभावित मतदान केंद्रों या क्षेत्रों में दोबारा मतदान कराने का अधिकार है। वहीं, चुनाव के नतीजों को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की जा सकती है।इसका मतलब है कि किसी पूरे राज्य या एक साथ कई राज्यों के विधानसभा चुनाव रद्द करने के लिए ठोस कानूनी आधार होना जरूरी है। इसके लिए अदालत या सक्षम चुनाव प्राधिकरण का उचित आदेश भी आवश्यक है।
Assembly Election: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव रद्द करने पर क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, किसी राज्य के विधानसभा चुनाव को एक इकाई मानकर चुनौती नहीं दी जा सकती। विधानसभा की हर सीट का चुनाव अलग-अलग होता है। ऐसे में किसी सीट पर दोबारा चुनाव कराने के लिए उसी निर्वाचन क्षेत्र में हुई गड़बड़ी को साबित करना जरूरी है। केवल राजनीतिक दलों की मांग या सामूहिक आरोपों के आधार पर किसी एक राज्य या कई राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे रद्द नहीं किए जा सकते।








