MP NEWS: इंदौर में बीजेपी की ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान प्रहलाद पांडेय का पोस्टर चर्चा में आ गया। पोस्टर पर सरकारी खर्च को लेकर सवाल लिखे थे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस पर नाराजगी जताई और पुलिस प्रहलाद को थाने ले गई। लेकिन नेताओं के सामने सवाल उठाने वाले प्रहलाद पांडेय आखिर कौन हैं, उनकी रोजी-रोटी कैसे चलती है और विरोध करने की शुरुआत कब हुई थी? जानिए इस एक्सप्लेनर में।
प्रहलाद पांडेय के पोस्टर ने सबका ध्यान खींच लिया
इंदौर में राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान एक पोस्टर ने सबका ध्यान खींच लिया। इसे लेकर पहुंचे थे प्रहलाद पांडेय। पोस्टर पर लिखा था- ’30 हजार रुपए का बल्ब, 33 हजार रुपए लीटर फिनाइल… जवाब दो।’ नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस पर नाराजगी जताई। इसके बाद पुलिस प्रहलाद को थाने ले गई। यह पहली बार नहीं है, जब प्रहलाद किसी नेता या सरकारी व्यवस्था के खिलाफ सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते दिखाई दिए हों। कभी वे नेताओं के बंगले के बाहर प्रदर्शन करते हैं, तो कभी अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ कई दिनों तक अनशन पर बैठते हैं। उनकी पत्नी संगीता भी इन आंदोलनों में उनके साथ रहती हैं। खास बात यह है कि पेशे से मोटिवेशनल स्पीकर प्रहलाद अपनी इस सक्रियता को राजनीतिक नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी बताते हैं।
MP NEWS: सवाल-1: कौन हैं प्रहलाद पांडेय?
प्रहलाद पांडेय इंदौर के रहने वाले हैं। पेशे से वे बिहेवियरल ट्रेनर और लीडरशिप कोच हैं। वे निजी कंपनियों में मैनेजमेंट और लीडरशिप डेवलपमेंट से जुड़ी ट्रेनिंग देते हैं। इसी काम से उनकी आजीविका चलती है। सार्वजनिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता लंबे समय से रही है। वे सरकारी कामकाज, जनसमस्याओं और नेताओं की जवाबदेही से जुड़े मामलों में विरोध दर्ज कराते रहे हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में नागरिकों का काम सिर्फ सरकार चुनना नहीं, बल्कि सरकार से सवाल पूछना भी है। प्रहलाद के मुताबिक, वे बीजेपी की पदयात्रा में भी इसी अधिकार का इस्तेमाल कर रहे थे। उनका मानना है कि जिस तरह हर व्यक्ति अपने परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाता है, उसी तरह देश और समाज के प्रति भी उसकी जिम्मेदारी होती है।
सवाल-2: पत्नी संगीता भी आंदोलनों में क्यों रहती हैं साथ?
प्रहलाद की पत्नी संगीता भी उनके विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों में सक्रिय रूप से शामिल रहती हैं। वे कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि आंदोलन की तैयारियों और दूसरे कामों में भी पति का साथ देती हैं। संगीता का तर्क है कि जब आम नागरिक टैक्स देता है तो उसे सरकारी व्यवस्था से सवाल पूछने का अधिकार भी है। वे कहती हैं कि अगर वे अपने घर में काम करने वाले व्यक्ति से उसके काम को लेकर सवाल कर सकती हैं, तो नेताओं और सरकार से सवाल पूछने में संकोच क्यों होना चाहिए? उनके मुताबिक, यह लड़ाई केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। बच्चों की सुरक्षा, दूषित पानी और दूसरी जनसमस्याएं पूरे समाज से जुड़ी हैं। व्यवस्था में सुधार नहीं होगा तो इसका असर आम लोगों पर पड़ेगा।
MP NEWS: सवाल-3: 16 साल पहले ट्रेन में क्या हुआ था, जिसने बदल दी जिंदगी?
प्रहलाद अपनी सार्वजनिक सक्रियता की शुरुआत करीब 16 साल पुरानी एक घटना से जोड़ते हैं। उनके मुताबिक, वे पत्नी के साथ इंदौर से जबलपुर जा रहे थे। उस समय उनकी पत्नी गर्भवती थीं और ट्रेन के जनरल डिब्बे में काफी भीड़ थी।
इसी दौरान कुछ लोगों ने एक गरीब महिला को कथित तौर पर जबरन ट्रेन से नीचे उतार दिया। प्रहलाद ने इसका विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई। प्रहलाद बताते हैं कि इसके बाद वे अपने परिवार को सतना छोड़कर पुलिस से एफआईआर दर्ज कराने की मांग करते रहे। उनका दावा है कि करीब 36 घंटे तक पुलिस से शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रयास करना पड़ा। एफआईआर दर्ज होने के बाद ही उन्होंने अपना विरोध खत्म किया। प्रहलाद का कहना है कि इस घटना के बाद ट्रेन की व्यवस्था में भी बदलाव हुआ। उनके मुताबिक, इसी अनुभव ने उन्हें सार्वजनिक मुद्दों पर आवाज उठाने और जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगने के लिए प्रेरित किया।
सवाल-4: कैलाश विजयवर्गीय और गोलू शुक्ला से क्या विवाद हुआ?
प्रहलाद का विरोध केवल हालिया पदयात्रा तक सीमित नहीं है। बीते कुछ महीनों में वे इंदौर के कई राजनीतिक और सार्वजनिक मुद्दों को लेकर चर्चा में रहे हैं।
जुलाई 2026 में कैलाश विजयवर्गीय के बंगले के बाहर प्रदर्शन
नीट परीक्षा में कथित घोटाले को लेकर प्रहलाद और उनकी पत्नी संगीता ने कैलाश विजयवर्गीय के नंदानगर स्थित बंगले के बाहर प्रदर्शन किया था। वे केंद्रीय स्तर पर जिम्मेदार मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रहलाद के मुताबिक, बिना अनुमति प्रदर्शन करने के कारण दोनों को जेल जाना पड़ा।
सितंबर 2026 में विधायक गोलू शुक्ला से विवाद
मरीमाता चौराहे पर अवैध होर्डिंग्स की रिकॉर्डिंग के दौरान प्रहलाद ने आरोप लगाया था कि विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों ने उनके साथ मारपीट की और मोबाइल छीन लिया। हालांकि, विधायक ने इन आरोपों को खारिज किया था। उनका कहना था कि प्रहलाद उनका नाम लेकर प्रचार पाना चाहते हैं।इसके बाद प्रहलाद और संगीता ने अवैध होर्डिंग्स हटाने की मांग को लेकर रीगल चौराहे पर नौ दिनों तक अनशन किया। नगर निगम और जिला प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त किया।

MP NEWS: सवाल-5: क्या प्रहलाद पांडेय सिर्फ इंदौर के मुद्दे उठाते हैं?
नहीं, प्रहलाद की सक्रियता इंदौर तक सीमित नहीं रही है। वे अपने वार्ड में पानी की समस्या से लेकर राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक मुद्दों पर भी विरोध दर्ज करा चुके हैं। उनके मुताबिक, वार्ड में जलसंकट के दौरान उन्होंने पार्षद पर पानी के टैंकर के वितरण में भेदभाव करने का आरोप लगाया था। विरोध के दौरान उन्होंने टैंकर की चाबी निकाल ली थी। उनका दावा है कि करीब 24 घंटे तक टैंकर खड़ा रहने के बाद सभी घरों में पानी पहुंचाने पर सहमति बनी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी वे दिल्ली पहुंचे थे। प्रहलाद के अनुसार, इस दौरान पुलिस ने उन्हें दो दिन तक हिरासत में रखा था।
सवाल-6: अन्ना आंदोलन से भी जुड़ा रहा है प्रहलाद का सफर?
प्रहलाद पांडेय की सक्रियता का एक पड़ाव भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन भी रहा है। साल 2012 में उन्होंने ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ के बैनर तले भोपाल में कोयला घोटाले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्हें चार दिन जेल में रहना पड़ा। यह वही दौर था, जब देशभर में अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन चल रहा था। इस आंदोलन ने देश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार तथा जवाबदेही के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
प्रहलाद की इस पृष्ठभूमि से पता चलता है कि उनकी सार्वजनिक सक्रियता किसी एक राजनीतिक दल या नेता के विरोध तक सीमित नहीं रही है। हालांकि, उनके आंदोलनों के अलग-अलग राजनीतिक संदर्भ भी रहे हैं।
MP NEWS: सवाल-7: क्या प्रहलाद पांडेय किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े हैं?
प्रहलाद पांडेय का दावा है कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं। उनका कहना है कि वे मुद्दों के आधार पर विरोध करते हैं और जहां उन्हें व्यवस्था में गड़बड़ी दिखाई देती है, वहां सवाल उठाते हैं।
उनके मुताबिक, अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग उनके आंदोलनों का समर्थन करते हैं। लेकिन वे किसी पार्टी के निर्देश पर काम नहीं करते।हालांकि, किसी आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलना और किसी राजनीतिक दल का सदस्य होना दो अलग-अलग बातें हैं। प्रहलाद अपनी सक्रियता को नागरिक जिम्मेदारी बताते हैं।
सवाल-8: प्रहलाद पांडेय के पोस्टर ने क्या सवाल खड़ा किया?
बीजेपी की पदयात्रा के दौरान प्रहलाद का पोस्टर सिर्फ एक व्यक्ति के विरोध तक सीमित नहीं रहा। इसने सरकारी खर्च, सार्वजनिक धन के इस्तेमाल और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही जैसे सवालों को भी चर्चा में ला दिया। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से सवाल पूछना और विरोध दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है। वहीं, सार्वजनिक कार्यक्रमों में व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में जरूरी है कि विरोध के मुद्दों पर जवाब दिया जाए और कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।
प्रहलाद पांडेय की कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है, जो अपनी पेशेवर जिंदगी में कंपनियों को नेतृत्व और व्यवहार का प्रशिक्षण देता है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में नेताओं और सरकारी व्यवस्था से जवाब मांगता दिखाई देता है। ट्रेन में हुई मारपीट की घटना से शुरू हुई उनकी मुहिम अब इंदौर की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। कैलाश विजयवर्गीय के सामने लहराया गया पोस्टर इसी लंबे सफर की एक नई कड़ी है।
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