Air Pollution Report 2025: कई लोगों का मानना है कि वायु प्रदूषण केवल सर्द मौसम में होने वाली समस्या है, लेकिन हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार यह साफ पता चलता है कि यह पूरे साल होने वाला स्वास्थ्य और पर्यावरण संकट बन गया है। पटाखे और पराली जलाना, विकास के नाम पर हो रहा निर्माण और धूल, सड़कों पर वाहनों की बढ़ती संख्या तथा मौसम में बदलाव—इन सबके मिलकर हवा को जहरीला बनाने का कार्य करते हैं।

Air Pollution: सुबह-शाम हवा सबसे ज्यादा खराब क्यों?
Air Pollution Report 2025: इसी के चलते 1 दिसंबर 2025 को उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वायु प्रदूषण को सिर्फ ठंड के मौसम में होने वाली रस्मी सुनवाई की तरह नहीं देखा जा सकता। उच्चतम न्यायालय ने कम समय और लंबे समय के समाधानों को खोजने के लिए महीने में दो बार सुनवाई करने का फैसला किया है।
CSE की रिपोर्ट के अनुसार इस साल पराली जलाने का प्रदूषण में केवल 5 से 22 प्रतिशत योगदान था। वहीं प्रदूषण का वास्तविक कारण वाहन, निर्माण, उद्योग और स्थानीय उत्सर्जन बताया गया है। कई बार लोग धुंध और कोहरे को सर्दियों के दिनों की प्राकृतिक समस्या समझ लेते हैं, लेकिन इसका एक मुख्य कारण बढ़ता हुआ प्रदूषण भी होता है।

शहरों की क्षमता पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल
Air Pollution Report 2025: दरअसल, सुबह 7 बजे से लगभग 10 बजे तक और शाम 6 बजे से 8:30 बजे तक सड़कों पर ट्रैफिक बढ़ने के साथ ही PM2.5, NO₂ और CO का स्तर भी बढ़ने लगता है, जो स्मॉग के रूप में हमें दिखाई देता है। PM2.5 कण इतने छोटे होते हैं कि आसानी से फेफड़ों और आंतरिक अंगों तक पहुंचकर बीमारी का खतरा बढ़ा देते हैं। इसी वजह से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

बता दें, सोमवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, “किसानों द्वारा पराली जलाने का मुद्दा राजनीतिक और अहम का मुद्दा नहीं बनना चाहिए।” प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल किया, “साल 2020 में जब कोविड महामारी थी, तब भी पराली जलाई जा रही थी। इसके बावजूद लोगों को साफ नीला आसमान कैसे देखने को मिला? अर्थात् वायु प्रदूषण के पीछे अन्य कारण भी हैं।”
10 दिसंबर 2025: अगली सुनवाई में क्या होगा?
Air Pollution Report 2025: इसी के साथ प्रधान न्यायाधीश ने कम समय और लंबे समय के उपायों में स्पष्टता की मांग की है और केंद्र से अब तक वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और अन्य संस्थानों द्वारा उठाए गए सभी विशिष्ट कदमों की जानकारी देने को कहा है। अब 10 दिसंबर 2025 को इस मुद्दे पर अगली सुनवाई की जाएगी।

इसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “देश का कोई भी शहर इतनी बड़ी आबादी को समायोजित करने या यह सोचकर विकसित नहीं किया गया था कि प्रत्येक घर में कई कारें होंगी। आइए देखें कि हमें कौन से उपाय सुझाए गए हैं और इन उपायों को कैसे लागू किया जाता है या फिर ये केवल कागजों पर ही रह जाते हैं।”
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