Deep fake: सोशल मीडिया पर एआई तकनीक से बने फर्जी वीडियो (Deepfake Videos) तेजी से बढ़ रहे हैं, और इनकी वजह से आम लोग बड़े पैमाने पर गुमराह हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल भ्रामक अभियान अब इतना उन्नत हो चुका है कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। अभी हालही में कई ऐसे वीडियों सामने आये है जो थे तो AI आधारित पर दिखने में वे वास्तव में रियलस्टिक लग रहे थे।
एआई वीडियो: नई डिजिटल चालबाज़ी
पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे वीडियो वायरल हुए, जिनमें नेताओं, फिल्मी सितारों और उद्योग जगत की हस्तियों को ऐसी बातें कहते हुए दिखाया गया, जो उन्होंने कभी कही ही नहीं। एआई आधारित डीपफेक तकनीक किसी भी चेहरे और आवाज़ की बेहद वास्तविक नकल तैयार कर देती है, जिससे ये वीडियो पूरी तरह असली लगते हैं। यह वीडियों अभी हालही में वायरल हो रहा है जिसमें कैसे शेर भी अचम्भा खा रहा है ।
Stupidity of the Maasai mara lion. pic.twitter.com/lNhGO2QGjo
— African prides (@rungunyika) December 6, 2025
Deep fake: चुनावी मौसम में बढ़ा खतरा
चुनावों के दौरान ऐसे वीडियो और अधिक खतरनाक हो जाते हैं। कई राज्यों में राजनीतिक पार्टियों के बारे में भ्रामक सामग्री प्रसारित की गई, जिसके चलते मतदाताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हुई। साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि डीपफेक आने वाले चुनावों को प्रभावित कर सकते हैं।

Deep fake: धोखाधड़ी का नया हथियार
सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो का इस्तेमाल सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। कई वीडियो में सेलिब्रिटी को निवेश स्कीम्स का प्रचार करते दिखाया जाता है। कुछ मामलों में आम लोगों की छवि खराब करने और उन्हें ब्लैकमेल करने तक के प्रयास सामने आए हैं। इसके चलते साइबर अपराधों के नए रूप सामने आ रहे हैं और शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
लोग क्यों फंस जाते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, आम यूज़र वीडियो पर भरोसा जल्दी कर लेते हैं। वीडियो फॉर्मेट का ‘प्रभाव’ और एआई की हाई-फ़िडेलिटी तकनीक मिलकर ऐसा भ्रम पैदा कर देती है कि लोग बिना जांच-पड़ताल किए कंटेंट को आगे बढ़ा देते हैं।
सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों का पक्ष
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को डीपफेक की पहचान और रोकथाम के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।
नई नीतियों के तहत ऐसे वीडियो को तुरंत प्लेटफ़ॉर्म से हटाना, फ़ैक्ट-चेकिंग बढ़ाना और संदिग्ध सामग्री को फ्लैग करना अनिवार्य किया जा रहा है।
कैसे पहचानें फर्जी एआई वीडियो ?
चेहरा और होंठों का मूवमेंट आवाज़ से मेल न खाना
रोशनी और छाया में असमानता
तेज़ मोशन में फ़्रेम टूटना
आवाज़ में नकली कंपन या एक जैसा टोन
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