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एम्स का चौंकाने वाला सर्वे, 13 साल की उम्र में नशे की ओर बढ़ते स्कूली बच्चे

स्कूल जाने वाले बच्चों को लेकर एम्स का एक हैरान करने वाला सर्वे सामने आया है। इस अध्ययन में खुलासा हुआ है कि देश के कई शहरों में स्कूली बच्चे कम उम्र में ही नशीले पदार्थों, धूम्रपान और शराब की ओर बढ़ रहे हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया है कि जैसे-जैसे छात्र उच्च कक्षाओं में पहुंचते हैं, नशीले पदार्थों का सेवन बढ़ता जाता है। कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों में नशे के इस्तेमाल की संभावना कक्षा आठवीं के छात्रों से लगभग दोगुनी पाई गई।
AIIMS

Delhi aiims: स्कूल जाने वाले बच्चों को लेकर एम्स का एक हैरान करने वाला सर्वे सामने आया है। इस अध्ययन में खुलासा हुआ है कि देश के कई शहरों में स्कूली बच्चे कम उम्र में ही नशीले पदार्थों, धूम्रपान और शराब की ओर बढ़ रहे हैं। सर्वे के मुताबिक, नशे की शुरुआत की औसत उम्र करीब 13 साल पाई गई है, जो इस बात का संकेत है कि रोकथाम की जरूरत प्राथमिक स्कूल स्तर से ही है।

कक्षा बढ़ने के साथ बढ़ता है नशे का खतरा

अध्ययन में यह भी सामने आया है कि जैसे-जैसे छात्र उच्च कक्षाओं में पहुंचते हैं, नशीले पदार्थों का सेवन बढ़ता जाता है। कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों में नशे के इस्तेमाल की संभावना कक्षा आठवीं के छात्रों से लगभग दोगुनी पाई गई। इससे यह साफ होता है कि माध्यमिक और उच्च विद्यालय स्तर पर लगातार जागरूकता और हस्तक्षेप बेहद जरूरी है।

Delhi aiims: एम्स के राष्ट्रीय नशा मुक्ति केंद्र ने किया अध्ययन

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के राष्ट्रीय नशा मुक्ति उपचार केंद्र की डॉ. अंजू धवन के नेतृत्व में यह अध्ययन किया गया है। इस रिसर्च को इस महीने ‘नेशनल मेडिकल जर्नल ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में किशोरों के बीच नशीले पदार्थों के चलन और उनके व्यवहार का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

10 शहरों के करीब 6 हजार छात्र सर्वे में शामिल

इस सर्वे में देश के 10 शहरों बेंगलुरु, चंडीगढ़, दिल्ली, डिब्रूगढ़, हैदराबाद, इंफाल, जम्मू, लखनऊ, मुंबई और रांची के सरकारी, निजी और ग्रामीण स्कूलों के छात्र शामिल थे। कक्षा 8वीं, 9वीं, 11वीं और 12वीं के कुल 5,920 छात्रों से जानकारी ली गई। ये आंकड़े मई 2018 से जून 2019 के बीच एकत्र किए गए थे।

Delhi aiims: सबसे कम उम्र में सूंघने वाले नशीले पदार्थों की शुरुआत

रिपोर्ट के अनुसार, किसी भी नशीले पदार्थ के सेवन की शुरुआत की औसत उम्र 12.9 साल पाई गई।
सबसे कम उम्र में शुरुआत सूंघने वाले नशीले पदार्थों (11.3 साल) की देखी गई। इसके बाद हेरोइन (12.3 साल) और डॉक्टर की सलाह के बिना ली जाने वाली ओपिओइड दवाएं (12.5 साल) का स्थान रहा।

हर सात में से एक छात्र कर चुका है नशे का इस्तेमाल

अध्ययन में पाया गया कि कुल मिलाकर, 15.1 प्रतिशत छात्रों ने कभी न कभी नशीले पदार्थों का इस्तेमाल किया, 10.3 प्रतिशत ने पिछले एक साल में और 7.2 प्रतिशत ने पिछले एक महीने में नशे के सेवन की बात स्वीकार की।

बच्चों की पहुंच में तंबाकू और शराब

Delhi aiims: जब छात्रों से पूछा गया कि क्या उनकी उम्र के बच्चों के लिए नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं, तो जवाब चौंकाने वाले थे। करीब 46.3 प्रतिशत छात्रों ने माना कि तंबाकू उत्पाद आसानी से मिल जाते हैं, जबकि 36.5 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि उनकी उम्र के लोग बिना ज्यादा परेशानी के शराब भी हासिल कर सकते हैं।

 

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