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Sydney News: एक बार फिर धर्म देखकर मासूमों को मारा गया

एक बार फिर धर्म देखकर मासूमों को मारा गया

Sydney News: सिडनी के बॉन्डी बीच पर हुआ आतंकी हमला केवल ऑस्ट्रेलिया की आंतरिक सुरक्षा पर हमला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे वैश्विक आतंकवाद के उस पैटर्न से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे भारत दशकों से जूझता आ रहा है। हनुक्का पर्व के दौरान हुई इस गोलीबारी में 16 लोगों की मौत ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियों ने इसे आतंकवादी हमला घोषित कर दिया है और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की चर्चा तेज होती जा रही है। इस हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या अब ऑस्ट्रेलिया भी उसी हकीकत से रू-बरू हो रहा है, जिसे भारत लंबे समय से झेलता रहा है जहां धर्म पूछकर हत्या, भीड़भाड़ वाले इलाकों में हमला और डर फैलाना आतंक की रणनीति रही है।

Sydney News: पिता-पुत्र आरोपी और कट्टर सोच की जांच

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सिडनी हमले के आरोपी पिता-पुत्र बताए जा रहे हैं, जिनकी पृष्ठभूमि, संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों की गहन पड़ताल की जा रही है। शुरुआती जांच में जिस तरह की वैचारिक सामग्री, ऑनलाइन संपर्क और संदिग्ध नेटवर्क सामने आ रहे हैं, उसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि किसी देश की आधिकारिक भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है, लेकिन जांच के दायरे में ऐसे नेटवर्क जरूर आए हैं, जिनका नाम पहले भी अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के मामलों में सामने आता रहा है।

Sydney News: भारत का अनुभव: जब आतंक ने पहचान पूछकर मारा

भारत के लिए यह बहस नई नहीं है। देश ने दिल्ली, मुंबई, जयपुर और अन्य शहरों में ऐसे हमले देखे हैं, जहां आम नागरिकों को केवल उनकी पहचान और धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। दिल्ली में हुए बम धमाकों से लेकर अन्य आतंकी घटनाओं तक, जांच एजेंसियों ने बार-बार एक ही बात कही आतंक का वैचारिक और लॉजिस्टिक आधार सीमा पार मौजूद नेटवर्क से जुड़ा रहा है। इन्हीं जांचों में पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठनों और उनके समर्थक ढांचे का नाम सामने आता रहा है। भारत ने इन हमलों के बाद सिर्फ शोक व्यक्त नहीं किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सबूत रखे, कूटनीतिक दबाव बनाया और सुरक्षा नीति में सख्ती दिखाई।

वही पैटर्न, वही चेतावनी

सिडनी हमले के बाद सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आतंक का तरीका, सोच और लक्ष्य बेहद परिचित लगते हैं। धार्मिक कार्यक्रम को निशाना बनाना, डर और नफरत फैलाना और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम पैदा करना—यह सब उस रणनीति का हिस्सा है, जो पहले भारत में देखी जा चुकी है। इसी वजह से अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या आतंक के इन नेटवर्कों पर सिर्फ स्थानीय स्तर पर कार्रवाई काफी है, या फिर उनके अंतरराष्ट्रीय ठिकानों और समर्थन तंत्र को निशाना बनाना जरूरी हो गया है।

Sydney News: पाकिस्तान पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

जांच से जुड़े सूत्रों और वैश्विक सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, दुनिया के कई आतंकी हमलों में जिन नेटवर्कों की विचारधारा, फंडिंग और प्रशिक्षण की चर्चा होती रही है, उनका सिरा बार-बार पाकिस्तान की धरती से जुड़े ढांचे तक पहुंचता रहा है। यही कारण है कि सिडनी हमले के बाद भी पाकिस्तान-आधारित आतंकी तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं। यह स्पष्ट किया जा रहा है कि सवाल किसी देश के आम नागरिकों पर नहीं, बल्कि उन आतंकी संगठनों और विचारधाराओं पर है, जो वर्षों से हिंसा को हथियार बनाकर दुनिया को अस्थिर करने की कोशिश करते रहे हैं।

अब ऑस्ट्रेलिया क्या करेगा?

भारत ने अपने अनुभव से दुनिया को यह दिखाया है कि आतंकवाद से निपटने के लिए केवल बयान और निंदा काफी नहीं होती। सख्त निगरानी, अंतरराष्ट्रीय दबाव, आतंकी फंडिंग पर चोट और जरूरत पड़ने पर कड़ा जवाब—यही मॉडल प्रभावी साबित हुआ है।अब नजरें ऑस्ट्रेलिया पर हैं। क्या वह भी आतंक की जड़ तक पहुंचने की कोशिश करेगा? क्या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान-आधारित आतंकी नेटवर्क को लेकर सवाल उठेंगे? और क्या आतंक के खिलाफ वैश्विक स्तर पर और कड़ा रुख देखने को मिलेगा?

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