Slip Disc Problem: आज के जीवन में कमर दर्द होना आम बात है, क्योंकि अधिकांश काम कुर्सी पर घंटों बैठकर किया जाता है। ऐसे में पीठ और मांसपेशियों में दर्द और जकड़न हो जाती है। लेकिन हर दर्द सामान्य कमर दर्द नहीं होता, यह स्लिप डिस्क की शुरुआत भी हो सकती है। स्लिप डिस्क एक ऐसी समस्या है, जिसमें न तो ठीक से खड़ा रहा जा सकता है और न ही ज्यादा देर तक बैठा जा सकता है।

आयुर्वेद में स्लिप डिस्क: अस्थि मज्जा विकार
आयुर्वेद में स्लिप डिस्क को अस्थि मज्जा विकार कहा जाता है। डिस्क रीढ़ की हड्डियों के बीच स्थित होती है। यह हड्डी की तुलना में नरम होती है और रीढ़ की हड्डी को लचीलापन प्रदान करती है। साथ ही यह शरीर को लगने वाले झटकों से भी बचाती है। कई बार रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क अपने स्थान से खिसक जाती है और आसपास की नसों पर दबाव डालने लगती है, जिससे पीठ दर्द की समस्या शुरू हो जाती है। यह दर्द पीठ से शुरू होकर पैरों तक पहुंच सकता है और दर्द से परेशान लोग कमर पकड़कर झुककर चलने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

Slip Disc Problem: स्लिप डिस्क होने के प्रमुख कारण
स्लिप डिस्क होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे लंबे समय तक बैठकर काम करना, भारी वजन उठाना, हमेशा झुककर काम करना, मोटापा, लगातार वाहन को एक ही पोजीशन में चलाना, अचानक झटका लगना या चोट लगना। शुरुआती अवस्था में जीवनशैली में कुछ बदलाव करके दर्द से राहत पाई जा सकती है, लेकिन दर्द अधिक बढ़ने पर डॉक्टर सर्जरी या फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं। इसलिए अधिक दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

स्लिप डिस्क से बचाव और दर्द कम करने के उपाय
स्लिप डिस्क से बचने या दर्द को बढ़ने से रोकने के लिए कुर्सी पर बैठते समय नरम कुशन का इस्तेमाल करें और बीच-बीच में उठकर चलें। लगातार लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने से बचें। इसके अलावा, गर्म पानी से सिकाई करें और दर्द वाले हिस्से पर तिल के तेल से मालिश करें, जिससे रीढ़ की हड्डी के आसपास रक्त संचार बेहतर हो और दर्द में राहत मिले।
साथ ही कुछ योगासन करके भी रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाया जा सकता है। इसके लिए कैट-काउ पोज, चाइल्ड्स पोज, कोबरा पोज, ब्रिज पोज और मर्कटासन जैसे आसन किए जा सकते हैं। ये आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने में मदद करते हैं।
Written by- Palak kumari







