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त्रिपुरा में 108 करोड़ की गांजा खेती पर बड़ा प्रहार, सुरक्षा बलों का संयुक्त अभियान

Drug Smuggler:

Drug Smuggler: त्रिपुरा में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य के सेपाहिजाला जिले में रविवार को दो अलग-अलग ऑपरेशन के दौरान करीब 108 करोड़ रुपये मूल्य के 23 लाख से अधिक गांजे के पौधों को नष्ट किया गया। ये पौधे लगभग 414 एकड़ पहाड़ी और दुर्गम भूमि पर फैले हुए थे। इस संयुक्त कार्रवाई में त्रिपुरा पुलिस, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), वन विभाग और उत्पाद शुल्क विभाग के जवान शामिल रहे।

तीन दिनों में कई जिलों में कार्रवाई, अवैध खेती पर सख्ती

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बीते तीन दिनों में सेपाहिजाला जिले के आनंदपुर और घाटीगढ़ जंगल क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गांजे की खेती को नष्ट किया गया। इसके अलावा दक्षिण त्रिपुरा और खोवाई जिलों में भी कई लाख गांजे के पौधों को समाप्त किया गया है। इससे पहले 27 दिसंबर को उनाकोटी जिले के माछमारा चाय बागान के पास कुली बस्ती जंगल क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर 15 से 17 हजार गांजे के पौधे नष्ट किए गए थे। इन अभियानों का नेतृत्व जिला पुलिस अधीक्षक या अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों ने किया।

Drug Smuggler: तस्करी का नेटवर्क और आजीविका का तर्क

पुलिस के मुताबिक त्रिपुरा में तैयार होने वाला सूखा गांजा स्थानीय स्तर पर कम खपत होता है और इसे बिहार, उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों में तस्करी कर ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। परिवहन के दौरान इसकी खेप अक्सर ट्रकों और यात्री ट्रेनों से बरामद होती है। कई ग्रामीणों, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, का दावा है कि वे आजीविका के लिए पहाड़ी इलाकों में गांजे की खेती करते हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया कि कई मामलों में सरकारी और वन भूमि पर अतिक्रमण कर अवैध खेती की जा रही थी। एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है।

एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तारियां

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अवैध गांजा खेती में संलिप्त कई लोगों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि नशे के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए ऐसे संयुक्त अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे। साथ ही सरकारी और वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण की पहचान कर उसे हटाने की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी, ताकि भविष्य में अवैध खेती पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।

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