Venezuela News: वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को लेकर दुनियाभर में नाराजगी देखी जा रही है। भारत में भी इसका विरोध शुरू हो गया है। रविवार को कई वामपंथी दलों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने की कड़ी निंदा की।
केंद्र सरकार से कड़ा रुख अपनाने की मांग
प्रदर्शन के दौरान सीपीआईएम नेताओं ने अमेरिका पर “साम्राज्यवादी सैन्य हमला” करने का आरोप लगाया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। वाम दलों ने केंद्र सरकार से भी मांग की कि वह अमेरिका की कार्रवाई के खिलाफ स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाए तथा वेनेजुएला के समर्थन में खड़ी हो। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश के तेल संसाधनों पर कब्जा करने के इरादे से यह हमला किया है। उनका कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे समय से वेनेजुएला पर हमले की धमकी दे रहे थे, और हालिया सैन्य कार्रवाई उसी नीति का हिस्सा है।
लगाया यूएन चार्टर उल्लंघन का आरोप
सीपीआईएम, सीपीआई, सीपीआईएमएल, आरएसपी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने इस मुद्दे पर संयुक्त बयान जारी किया। सीपीआईएम के महासचिव एमए बेबी, सीपीआई के डी. राजा, सीपीआईएमएल के दीपांकर भट्टाचार्य, एआईएफबी के जी. देवराजन और आरएसपी के मनोज भट्टाचार्य ने बयान में कहा कि अमेरिका की कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन है और एक संप्रभु देश के खिलाफ हमला है।
बयान में कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला के तेल भंडार पर कब्जा करने की बात कहना इस हमले के पीछे के असली इरादों को उजागर करता है। साथ ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान पर भी चिंता जताई गई, जिसमें उन्होंने क्यूबा और मेक्सिको को अगला निशाना बताए जाने का दावा किया है। वाम दलों ने इसे मोनरो डॉक्ट्रिन के विस्तार के रूप में बताते हुए अमेरिका की नीतियों की कड़ी आलोचना की।
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