UPA Laws Amendment: केंद्र सरकार अब यूपीए सरकार के कार्यकाल में लागू किए गए दो अहम कानूनों – शिक्षा का अधिकार (RTE) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) में सुधार की दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है। सरकार का मानना है कि इन कानूनों की मंशा भले ही मजबूत रही हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके क्रियान्वयन में गंभीर खामियां रह गई हैं, जिसके चलते लाभ सभी पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पाया।
पहले नियमों से सुधार, जरूरत पड़ी तो संसद में आएगा बिल
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चरण में इन कानूनों में नियमों और प्रशासनिक आदेशों के जरिए बदलाव किए जाएंगे। यदि इससे अपेक्षित परिणाम नहीं मिले, तो संसद में संशोधन विधेयक (बिल) लाने का विकल्प भी खुला रखा गया है। इसके साथ ही सरकार आवास के अधिकार को भी कानूनी अधिकार का दर्जा देने पर विचार कर रही है।
UPA Laws Amendment: 100% रजिस्ट्रेशन पर प्रधानमंत्री का जोर
परामर्श प्रक्रिया से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट निर्देश है कि हर लाभार्थी का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए। योजनाओं का लाभ समय पर, पारदर्शी तरीके से और केवल पात्र लोगों तक पहुंचे यही सरकार की प्राथमिकता है।
UPA काल के कानूनों में बताई गईं तीन बड़ी कमियां
सरकार की आंतरिक समीक्षा में सामने आया है कि यूपीए सरकार के समय बनाए गए विकास से जुड़े अधिकार आधारित कानूनों में तीन बड़ी कमियां रहीं—सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाई, हर जरूरतमंद परिवार तक खाद्य सुरक्षा नहीं पहुंच सकी और योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही कमजोर रही।
UPA Laws Amendment: सरकार के तीन बड़े लक्ष्य
सरकार अब शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आवास जैसे पांच अहम क्षेत्रों में सुधार के लिए तीन ठोस लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रही है—
1. समय-सीमा के साथ पूर्ण कवरेज – हर योजना के लिए स्पष्ट लक्ष्य
2. डिजिटल क्रियान्वयन और रियल टाइम मॉनिटरिंग
3. हर लाभार्थी की पहचान सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रव्यापी पंजीकरण अभियान
क्या है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून का उद्देश्य देश के नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है। इसके तहत FSSAI की स्थापना की गई, जो खाद्य उत्पादकों से लेकर होटल, ढाबा, स्ट्रीट फूड विक्रेता और ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म तक पर निगरानी रखता है। उल्लंघन की स्थिति में जुर्माना, लाइसेंस रद्द और गंभीर मामलों में जेल तक का प्रावधान है।
UPA Laws Amendment: शिक्षा का अधिकार कानून की सीमाएं
शिक्षा का अधिकार कानून के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का संवैधानिक अधिकार मिला। हालांकि यह कानून कॉलेज और उच्च शिक्षा पर लागू नहीं होता, जिसे लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
मनरेगा की जगह आए नए कानून पर भी हुआ था विरोध
गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार ने मनरेगा की जगह विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB–G Ram G बिल पारित कराया था। दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बना। विपक्ष ने इस कानून में महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर कड़ा विरोध जताया था।
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