SIR Extended: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पुडुचेरी, गोवा, लक्षद्वीप, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अंतिम तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता 19 जनवरी तक दावा और आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की मांग पर लिया गया निर्णय
निर्वाचन आयोग ने यह फैसला संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की मांग और सभी पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए लिया है। इस संबंध में आयोग ने गुरुवार को एक आधिकारिक पत्र जारी कर जानकारी दी।
SIR Extended: केवल दावा-आपत्ति की अवधि बढ़ी
आयोग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, समय-सीमा में यह विस्तार सिर्फ दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि के लिए लागू होगा। मतदाता अब अपने विवरण की जांच कर सकते हैं, फॉर्म-6 के जरिए नाम जोड़ सकते हैं या किसी भी तरह की आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
27 दिसंबर के कार्यक्रम का हवाला
नोटिफिकेशन में आयोग के 27 दिसंबर 2025 के उस पत्र का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें विशेष गहन पुनरीक्षण का पूरा कार्यक्रम जारी किया गया था। इसमें 1 जनवरी 2026 को पात्रता तिथि निर्धारित की गई थी।
SIR Extended: राजपत्र में प्रकाशन और व्यापक प्रचार के निर्देश
निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि इस संशोधित कार्यक्रम को संबंधित राज्य राजपत्र के विशेष अंक में तत्काल प्रकाशित किया जाए। साथ ही, मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को मीडिया, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल ऐप के जरिए इसकी जानकारी आम जनता तक पहुंचाने को कहा गया है।
2026 विधानसभा चुनावों से पहले अहम अभ्यास
यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों को अपडेट करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। इसका उद्देश्य हर योग्य नागरिक का नाम सूची में जोड़ना और मृत, स्थानांतरित, डुप्लिकेट या अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है।
SIR Extended: फरवरी 2026 में जारी होगी अंतिम मतदाता सूची
आयोग के अनुसार, प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन पहले ही दिसंबर 2025 में किया जा चुका है। दावे-आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची फरवरी 2026 में जारी की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने पहली बार वोट डालने वाले और नए योग्य मतदाताओं से अपील की है कि वे समय रहते फॉर्म-6 जमा करें। राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बताया है।
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