Ghaziabad News: कभी बदमाशों को दौड़ाकर पकड़ने और मौके पर थप्पड़ जड़ने के कारण ‘लेडी सिंघम’ के नाम से पहचानी जाने वाली महिला दरोगा भुवनेश्वरी सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनकी बहादुरी नहीं बल्कि रिश्वतखोरी है। गाजियाबाद में एंटी-करप्शन टीम ने उन्हें 45 हजार रुपये की घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है।
स्पोर्ट्स कोटे से भर्ती, इंस्पेक्टर बनने की दहलीज तक पहुंचीं
अलीगढ़ निवासी भुवनेश्वरी सिंह वॉलीबॉल की राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी रह चुकी हैं। खेल कोटे से वर्ष 1999 में यूपी पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुईं। बाद में वह हेड कॉन्स्टेबल बनीं और 2013 में दरोगा के पद पर प्रमोट हुईं। हाल ही में वह इंस्पेक्टर पद की ट्रेनिंग भी पूरी कर चुकी थीं, लेकिन विभागीय जांच के कारण उनका प्रमोशन रुका हुआ था।
Ghaziabad News: शादी नहीं की, दो बच्चों को लिया गोद
भुवनेश्वरी सिंह ने शादी नहीं की। सहकर्मियों के मुताबिक वह अक्सर कहती थीं कि शादी ही परिवार का एकमात्र जरिया नहीं है। उन्होंने एक बच्ची और एक बेटे को गोद लिया और दोनों की पढ़ाई-लिखाई व परवरिश की जिम्मेदारी खुद निभा रही थीं।
एनकाउंटर से चर्चा में, बदमाशों पर सख्त रवैया
भुवनेश्वरी अपनी कड़क कार्यशैली के लिए जानी जाती थीं। छेड़छाड़ के मामलों में अभियान के दौरान वह आरोपियों को मौके पर ही थप्पड़ मार देती थीं। 23 सितंबर 2025 को गाजियाबाद में एक बदमाश के एनकाउंटर में शामिल रहीं, जहां उन्होंने आरोपी के पैर में गोली मारकर उसे कंधे पर लादकर अस्पताल पहुंचाया था। इस कार्रवाई के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था।
Ghaziabad News: 2022 में भी रिश्वत लेते पकड़ी जा चुकी
यह पहला मौका नहीं है जब उनकी वर्दी दागदार हुई हो। जून 2022 में कानपुर में एक सेक्स रैकेट का खुलासा करने के बाद आरोपियों को छोड़ने के लिए 15 लाख रुपये की मांग करने का मामला सामने आया था। तब वह 50 हजार रुपये लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार हुई थीं और जेल भी गई थीं। जमानत के बाद लंबे समय तक सस्पेंड रहीं और बाद में गाजियाबाद ट्रांसफर कराया।
45 हजार की घूस लेते अरेस्ट
13 जनवरी 2026 को साहिबाबाद क्षेत्र में दहेज से जुड़े एक मामले में पीड़ित से 45 हजार रुपये लेते ही एंटी-करप्शन टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
जिस महिला दरोगा को कभी बहादुरी और सख्ती की मिसाल माना जाता था, वही अब दो बार रिश्वतखोरी के मामलों में पकड़ी जा चुकी हैं। ‘लेडी सिंघम’ की छवि से लेकर जेल की सलाखों तक का यह सफर यूपी पुलिस के लिए भी एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।







