External affairs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ रिश्तों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सख्त रुख के बाद अब अमेरिका ने संवाद का रास्ता चुना है। इसी कड़ी में अमेरिकी कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को नई दिल्ली पहुंचा और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। यह बैठक भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों पर बातचीत के लिए अहम मानी जा रही है।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा
भारत-अमेरिका के बीच हुई इस बैठक में व्यापार, सुरक्षा और उभरती तकनीकों जैसे अहम विषयों पर चर्चा हुई। मौजूदा समय में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की स्थिति के बीच यह मुलाकात खास मानी जा रही है। बैठक में शामिल अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बातचीत को “उत्पादक” बताया। उन्होंने कहा कि चर्चा का फोकस सुरक्षा सहयोग, व्यापार विस्तार और महत्वपूर्ण तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने पर रहा। अमेरिकी कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में जिमी पैट्रोनिस, माइक रोजर्स और एडम स्मिथ शामिल थे। यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
External affairs: जयशंकर ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बातचीत को सकारात्मक बताया। उन्होंने लिखा कि भारत-अमेरिका संबंधों के विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र और यूक्रेन संघर्ष पर भी चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस के साथ संवाद दोनों देशों के रिश्तों का अहम हिस्सा रहा है। वहीं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी X पर जयशंकर को टैग करते हुए लिखा कि दोनों पक्षों ने मजबूत सुरक्षा, व्यापार विस्तार और महत्वपूर्ण तकनीकों में सहयोग को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
50% टैरिफ से बिगड़े थे रिश्ते
External affairs: गौरतलब है कि भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव उस समय बढ़ा जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा दिया था। इसमें रूसी तेल खरीद को लेकर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क भी शामिल था। पिछले साल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अब तक सहमति नहीं बन पाई है। इसका मुख्य कारण अमेरिका की यह मांग रही है कि भारत अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को खोले। टैरिफ के अलावा, रिश्तों पर ट्रंप के भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर दिए गए बयान और अमेरिका की नई आप्रवासन नीति का भी असर पड़ा है। मौजूदा बैठक को दोनों देशों के बीच संसदीय स्तर पर संवाद बढ़ाने और व्यापार व रक्षा सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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