pm modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को तेलंगाना के हैदराबाद में आयोजित ‘विंग्स इंडिया 2026’ कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का विमानन उद्योग एक नए युग में प्रवेश कर चुका है और आने वाला समय इस क्षेत्र के लिए आशाओं और संभावनाओं से भरा हुआ है।
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत के एविएशन सेक्टर में ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब भारत में हवाई यात्रा कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित थी, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार बन चुका है और यात्रियों की संख्या में लगातार तेज़ी से वृद्धि हो रही है।
हवाई यात्रा अब ‘एक्सक्लूसिव’ नहीं, ‘इन्क्लूसिव’
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य हवाई यात्रा को आम नागरिकों तक पहुंचाना है। इसी सोच के तहत टियर-2 और टियर-3 शहरों को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ा गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में देश में केवल 17 एयरपोर्ट्स थे, जबकि आज यह संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो चुकी है। इसके साथ ही देश में 100 से ज्यादा एरोड्रोम को भी सक्रिय किया गया है।
pm modi: बदली हवाई कनेक्टिविटी की तस्वीर
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार द्वारा शुरू की गई उड़ान योजना के जरिए किफायती हवाई सेवाओं को बढ़ावा दिया गया है। इस योजना के तहत अब तक लगभग डेढ़ करोड़ यात्री उन मार्गों पर यात्रा कर चुके हैं, जो पहले अस्तित्व में ही नहीं थे। उन्होंने बताया कि सरकार उड़ान योजना के अगले चरण पर भी काम कर रही है, जिससे स्थानीय और सस्ती हवाई कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलेगी।
pm modi: 2047 तक 400 से ज्यादा एयरपोर्ट्स का लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे देश की एयर एक्टिविटी में भी कई गुना विस्तार होगा। अनुमान है कि 2047 तक भारत में 400 से अधिक एयरपोर्ट्स होंगे, जिससे एक विशाल हवाई नेटवर्क तैयार होगा और देश के हर कोने तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
पर्यटन और आत्मनिर्भरता पर सरकार का फोकस
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार पर्यटन क्षेत्र के विकास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। देशभर में पर्यटन स्थलों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है और हवाई यात्रा बड़ी संख्या में लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है। आने वाले वर्षों में हवाई यात्रा की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, जिससे निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को एक प्रमुख वैश्विक विमानन केंद्र बनाने के लिए आत्मनिर्भरता को मजबूत करना जरूरी है। भारत अब विमान डिजाइन, निर्माण और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) सिस्टम पर विशेष जोर दे रहा है। देश में सैन्य और परिवहन विमानों का घरेलू उत्पादन शुरू हो चुका है और नागरिक विमान निर्माण की दिशा में भी तेजी से प्रगति हो रही है।
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