Ayurvedic Diet Tips: बसंत ऋतु प्रकृति में नई ऊर्जा, हरियाली और रंगों का संचार करती है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह मौसम स्वास्थ्य की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। दिन में बढ़ती गर्माहट और रात में हल्की ठंडक के कारण शरीर में कफ दोष सक्रिय हो जाता है। यही कारण है कि कई लोगों को इस मौसम में रात के समय पेट भारी लगना, अपच या नींद में बाधा जैसी समस्याएं महसूस होती हैं।
क्यों बढ़ती हैं समस्याएं?
आयुर्वेद के अनुसार शीत ऋतु में शरीर में कफ का संचय होता है। बसंत में सूर्य की तीव्रता बढ़ने पर यह कफ पिघलने लगता है। यदि इस समय रात में भारी, तैलीय या ठंडा भोजन किया जाए तो कफ और बढ़ सकता है, जिससे जुकाम, खांसी, पाचन संबंधी परेशानी तथा चयापचय की गति धीमी होने जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए इस मौसम में हल्का और सुपाच्य भोजन करना आवश्यक बताया गया है।
Ayurvedic Diet Tips: रात के भोजन में क्या शामिल करें?
रात के भोजन के लिए मूंग दाल की खिचड़ी को श्रेष्ठ माना गया है। यह हल्की, सुपाच्य और पेट पर कम दबाव डालने वाली होती है। इसमें थोड़ी सोंठ मिलाने से इसके गुण और बढ़ जाते हैं। भुनी हुई मौसमी सब्जियां जैसे लौकी, तोरई और परवल फाइबर से भरपूर होती हैं, जो कब्ज से बचाव में सहायक हैं। बाजरे की रोटी सीमित मात्रा में लेने से शरीर की अतिरिक्त नमी कम करने में मदद मिलती है।
अदरक और शहद मिलाकर गुनगुना पानी पीना श्वसन तंत्र को साफ रखने और कफ कम करने का परंपरागत उपाय है। मेथी का साग इस मौसम में विशेष लाभकारी माना गया है, विशेषकर मधुमेह या जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों के लिए। दूध का सेवन करना हो तो हल्दी मिलाकर गुनगुना दूध लेना उपयुक्त है।
Ayurvedic Diet Tips: अन्य उपयोगी विकल्प
जौ का सूप, सहजन की फली, पपीता तथा सोंठ और अजवाइन का तड़का भी रात के भोजन में शामिल किया जा सकता है। ये सभी पाचन को सुदृढ़ करने और कफ संतुलित रखने में सहायक माने जाते हैं।
बसंत ऋतु के स्वर्णिम नियम
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रात का भोजन जल्दी करें, संभव हो तो आठ बजे तक।
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ठंडे पानी का सेवन न करें।
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दही और अत्यधिक तैलीय भोजन से बचें।
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भोजन हल्का और सुपाच्य रखें।
आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि ऋतु के अनुसार आहार और दिनचर्या में परिवर्तन करने से शरीर संतुलित रहता है और मौसमी बीमारियों से बचाव संभव है।
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