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अमेरिका में कंप्यूटर वैज्ञानिक भारतीय मूल के!

Indians in US

Indians in US: आज अमेरिका आर्टिफिशियल इंटैंलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता/एआई में दुनिया के अन्य देशों से सबसे आगे है। वहां काम करने वाले वैज्ञानिक ज्यादातर भारत मूल के हैं। इन्हीं में से एक स्टेनफोर्ड के प्रोफेसर ‘ एआई इम्पैक्ट 2026’ सम्मिट यानी सम्मेलन में दिल्ली आये- सूर्य गांगुली एसोसिएट प्रोफेसर, एप्लाइड फिजिक्स और स्टेनफोर्ड इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो हैं। उन्होंने ही अपने वक्तव्य में जिक्र किया कि अमेरिका में अधिकांश श्रेष्ट कम्प्यूटर वैज्ञानिक भारत मूल के हैं।

गांगुली जब एएनआई से बात कर रहे थे, तब उन्होंने कहा कि भारत अब अपने टैलेंट को रोकने का प्रयास कर रहा है, उसी के कारण आज भारत एआई के एप्लिकेसन्स को सम्मिट के माध्यम से प्रदर्शित कर रहा है। और आगे अपने देश में बने एआई की विशिष्ट भूमिकाओं को संचालित करने में अन्य देशों से आगे निकल सकता है। यह पूरी क्षमता युवा भारतीय वैज्ञानिकों के पास है। मैं इस बात से बहुत खुश हूं। विज्ञान का कार्य वास्तविकताओं से जुड़ा होता है। मेरा विचार है कि विशेष कार्य को करने वाले एआई के लिए एक रेगुलेशन यानी नियम की जरूरत होती है। मै भी ऐसी अवस्था से गुजरा हूं।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी भारतीय टैलेंट की जमकर प्रशंसा की, विश्व की बड़ी-बड़ी कंपनियों के सीइइओ भी भारतीय हैं। जो भी टैलेंट बाहर गया, उसने अपने फील्ड में स्थान बनाया। इसका श्रेय उनकी सरकारों और संस्थाओं को जाता है, जिन्होंने अनुसंधानों के लिये पर्याप्त धन का प्रवंध किया। उसी के फल से नये-नये आविष्कारों का जन्म हुआ और आगे भी होता रहेगा।

फांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने एआई सम्मिट में कहा कि भारत और फ्रांस के एआई के विकास में समान विचार हैं। इस ओर हम काम कर रहे हैं। आने वाले जी-7 के सम्मेलन की अध्यक्षता राष्ट्रपति मैक्रों कर रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सम्मिट में आने के लिए उनका निमंत्रण है। उस सम्मिट में एआई का सही ढ़ंग से प्रयोग करने के लिए विचार कर रहे हैं। बच्चों और किशोरों को सुरक्षित रखने के लिए मोबाईल और डिजिटल से दूर रखने की जरूरत पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, क्योंकि बच्चों के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड रहा है, उसके कारण समय पर वह अपने रचनात्मक कार्यों से दूर जा रहे हैं। ऐसे अध्ययन सामने आ रहे हैं, जिसमें नई पौध की सोचने की क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है।

21 वीं शताब्दी एआई की ओर तेजी से बढ़ रही है। उसी का भविष्य दिख रहा है। ऐसे में शारीरिक और मानसिक क्षमता को सही दिशा देने की जरूरत है। लेकिन दूसरी ओर माहौल भयंकर प्रदूषण की ओर जा रहा है। आये दिन ऐसी खबरें आ रही हैं, जिसमें मासूम बच्चों को सेक्स का शिकार बनाया जा रहा है। उनके बचपने की मौत हो रही है। एआई भी बच्चों के मन में तरह-तरह के प्रदूषण को फैलाने में सहायक हो रहा है। इस पर सभी सरकारों को सोचने और कार्य करने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ी का वातावरण स्वस्थ रहे।

लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल

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