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Kanpur News: फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश

Kanpur News: फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश

Kanpur News: कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट तैयार करने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह अलग-अलग राज्यों के कॉलेज-विश्वविद्यालयों के नाम पर बिना परीक्षा दिए डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराता था। शुरुआती जांच के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

कैसे काम करता था सिंडिकेट

जांच अधिकारियों के मुताबिक गिरोह का मास्टरमाइंड पहले एडमिशन एजेंट के तौर पर सक्रिय था। धीरे-धीरे उसने अलग-अलग राज्यों में संपर्क बनाकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जो जरूरत के हिसाब से मार्कशीट, सर्टिफिकेट और डिग्री तैयार कर देता था।बताया जा रहा है कि हर काम के लिए तय रेट होते थे और डिग्री तैयार होने में कुछ ही दिनों का समय लगता था। गिरोह का दावा था कि घर बैठे डिग्री  उपलब्ध कराई जा सकती है।

Kanpur News: कमीशन का पूरा खेल

पुलिस के अनुसार, इस अवैध कारोबार में मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा नेटवर्क से जुड़े लोगों और कथित सहयोगियों में बांटा जाता था। एजेंटों के जरिए ग्राहक लाए जाते और तय रकम के बदले मार्कशीट-डिग्री तैयार कर दी जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में अलग-अलग कोर्स जैसे ग्रेजुएशन, फार्मेसी और अन्य डिग्रियों के नाम पर सर्टिफिकेट उपलब्ध कराए गए।

Kanpur News:  कई राज्यों तक फैली पहुंच

जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक सक्रिय था। अलग-अलग शहरों में बैठे एजेंट जरूरतमंद लोगों से संपर्क करते और दस्तावेज तैयार कराने की प्रक्रिया पूरी कराते थे।
छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध मार्कशीट, सर्टिफिकेट और दस्तावेज बरामद होने की बात सामने आई है, जिनकी सत्यता की जांच की जा रही है।पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरोह मुख्य रूप से तीन तरीकों से काम करता था: पुराने डेट में मार्कशीट तैयार कराना कॉलेज में दाखिले के नाम पर प्रक्रिया दिखाकर डिग्री उपलब्ध कराना सीधे फर्जी मार्कशीट और सर्टिफिकेट तैयार कर देना इन तरीकों से लोगों को भरोसा दिलाया जाता था कि दस्तावेज “मान्य” हैं, जबकि असल में वे जांच में फर्जी पाए गए।

 पीड़ितों की शिकायतें भी सामने आईं

नेटवर्क के खुलासे के बाद कुछ लोग पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंचे हैं। उनका कहना है कि पैसे देने के बाद भी उन्हें समय पर दस्तावेज नहीं मिले या बाद में दस्तावेज संदिग्ध निकले।पुलिस अब ऐसे सभी मामलों की जांच कर रही है और लोगों से अपील की है कि किसी भी शैक्षणिक दस्तावेज के लिए वैध और अधिकृत संस्थानों से ही संपर्क करें। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। जिन-जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनकी भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के फर्जीवाड़े से न केवल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि युवाओं का भविष्य भी खतरे में पड़ता है।यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि शिक्षा और करियर में शॉर्टकट लेने का रास्ता जोखिम भरा है। फर्जी डिग्री या मार्कशीट का इस्तेमाल कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह के संदिग्ध ऑफर से सावधान रहें और ऐसी गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें।

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