Women’s Day Special: दुनिया भर में महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से ज्यादा होती है। रिसर्च बताती हैं कि महिलाएं न केवल लंबे समय तक जीती हैं, बल्कि तनाव की स्थिति में बेहतर फैसले लेने, भावनाओं को समझने और कई काम एक साथ करने में भी आगे रहती हैं। उनके शरीर और दिमाग का काम करने का तरीका कई मामलों में पुरुषों से अलग होता है।
पुरुषों से औसतन 5 साल ज्यादा जीती हैं महिलाएं
संयुक्त राष्ट्र के पॉपुलेशन डिवीजन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में महिलाओं की औसत उम्र लगभग 76 साल 5 महीने है। वहीं पुरुषों की औसत उम्र करीब 71 साल 2 महीने होती है। यानी औसतन महिलाएं पुरुषों से लगभग 5 साल ज्यादा जीती हैं। भारत में भी यही रुझान देखने को मिलता है। यहां महिलाओं की औसत उम्र लगभग 74 साल 5 महीने है, जबकि पुरुषों की औसत उम्र करीब 71 साल 2 महीने है। इसका मतलब है कि भारत में महिलाएं पुरुषों से लगभग 3 साल ज्यादा जीती हैं।जन्म से लेकर जीवन के अलग-अलग चरणों तक महिलाओं के जीवित रहने की संभावना ज्यादा देखी जाती है।

Women’s Day Special: जन्म से बुढ़ापे तक महिलाओं की ताकत
जन्म: यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया की एक रिसर्च बताती है कि लड़कों की तुलना में लड़कियों के प्री-मैच्योर जन्म लेने की संभावना करीब 60% कम होती है। इसके अलावा लड़कियों में शिशु मृत्यु दर भी कम पाई जाती है। हालांकि यह अंतर विकसित देशों में ज्यादा साफ दिखाई देता है।
युवावस्था: हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के अनुसार इंसान के दिमाग का आगे का हिस्सा फैसले लेने की क्षमता को नियंत्रित करता है। यह हिस्सा महिलाओं में पुरुषों की तुलना में जल्दी विकसित हो जाता है।इसी वजह से दुर्घटनाओं या हिंसक घटनाओं के कारण महिलाओं की मौत की संभावना पुरुषों की तुलना में कम होती है।
बुढ़ापे: बढ़ती उम्र में भी कई गंभीर बीमारियां महिलाओं में अपेक्षाकृत कम पाई जाती हैं। जैसे फेफड़ों की बीमारी या दिल से जुड़ी समस्याएं। इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि पुरुषों में धूम्रपान और शराब पीने की आदत ज्यादा होती है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लगभग 52% पुरुष नियमित शराब पीते हैं, जबकि महिलाओं में यह आंकड़ा करीब 35% है।
इसके अलावा एजेंसी फॉर हेल्थकेयर रिसर्च एंड क्वालिटी की रिपोर्ट बताती है कि महिलाएं नियमित हेल्थ चेकअप कराने के मामले में ज्यादा जागरूक होती हैं। बीमार पड़ने पर वे डॉक्टर के पास जाने में भी ज्यादा सक्रिय रहती हैं।

1. महिलाओं की इमोशनल इंटेलिजेंस ज्यादा मजबूत
रिसर्च के अनुसार महिलाएं अपनी और दूसरों की भावनाओं को समझने में पुरुषों से बेहतर होती हैं।अमेरिकी कंसल्टेंसी फर्म कॉर्न फेरी हे ग्रुप की एक स्टडी में पाया गया कि इमोशनल इंटेलिजेंस के 12 में से 11 पैमानों पर महिलाएं पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं।
महिलाएं अपनी भावनाओं को समझने में पुरुषों से 86% बेहतर होती हैं। वहीं दूसरों के प्रति सहानुभूति दिखाने में भी लगभग 46% बेहतर पाई गई हैं। कई मामलों में महिलाएं सिर्फ किसी व्यक्ति की आंखें देखकर भी उसकी भावनाओं को समझ सकती हैं।
आंखों से भावनाएं समझने में भी महिलाएं आगे
2022 में भारत सहित दुनिया के 57 देशों में एक स्टडी की गई। इसमें प्रतिभागियों को 36 लोगों की आंखों की तस्वीरें दिखाकर पूछा गया कि वे क्या महसूस कर रहे हैं।इस प्रयोग में 36 देशों में महिलाओं का प्रदर्शन पुरुषों से बेहतर रहा, जबकि 21 देशों में महिलाएं पुरुषों के बराबर रहीं।कई लोग इमोशनल इंटेलिजेंस को महिलाओं की कमजोरी मानते हैं, लेकिन यह धारणा सही नहीं है।
अमेरिकी मनोवैज्ञानिक डेनियल गोलमैन के अनुसार किसी भी काम में बेहतर परिणाम पाने के लिए जरूरी कौशलों में से लगभग 67% हिस्सा इमोशनल इंटेलिजेंस का होता है। यानी यह IQ से भी ज्यादा अहम हो सकता है।हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की रिपोर्ट भी बताती है कि सफल और प्रभावी नेताओं में एक चीज कॉमन होती है, उनकी इमोशनल इंटेलिजेंस मजबूत होती है।

2. तनाव में भी बेहतर फैसले लेती हैं महिलाएं
यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया की न्यूरोसाइंटिस्ट मारा माथर ने 2016 में एक अध्ययन किया। इसमें सामने आया कि जब किसी व्यक्ति पर दबाव बढ़ता है, तब महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक संतुलित और बेहतर निर्णय लेती हैं।
तनाव की स्थिति में पुरुष अक्सर ज्यादा जोखिम भरे फैसले लेते हैं, जबकि महिलाएं समय लेकर स्थिति का विश्लेषण करती हैं और ऐसे निर्णय लेने की कोशिश करती हैं जिनसे बेहतर परिणाम मिल सकें।
माथर के अनुसार निर्णय लेने के तरीके पर की गई 32 अलग-अलग स्टडीज में से 12 में यह पाया गया कि महिलाएं ज्यादा विश्लेषणात्मक फैसले लेती हैं, जबकि बाकी 20 स्टडीज में पुरुष और महिलाओं के बीच खास अंतर नहीं मिला।
Women’s Day Special: महिला लीडरशिप से कंपनियों को भी फायदा
मारा माथर ने 2016 में पीटरसन इंस्टीट्यूट की एक रिसर्च का भी हवाला दिया। इस अध्ययन में 20 हजार से ज्यादा कंपनियों का विश्लेषण किया गया था।इसमें पाया गया कि जिन कंपनियों की शीर्ष नेतृत्व टीम में करीब 30% महिलाएं शामिल होती हैं, वे कंपनियां औसत से 15% ज्यादा मुनाफा कमाती हैं।
2023 में हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की 200 कंपनियों पर की गई एक स्टडी में भी सामने आया कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में महिलाओं की मौजूदगी से बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं।

3. महिलाएं कम बीमार पड़ती हैं और रिकवरी भी बेहतर
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. सपना रैना के अनुसार गंभीर बीमारियों से उबरने की क्षमता भी महिलाओं में ज्यादा होती है।भारत में कैंसर से पीड़ित हर 1 लाख पुरुषों में लगभग 171 लोगों की मौत हो जाती है, जबकि 1 लाख महिलाओं में करीब 126 मौतें होती हैं।
इस अंतर की एक वजह महिलाओं और पुरुषों की जैविक बनावट है। गर्भ में बच्चे के विकास के दौरान दो क्रोमोजोम उसकी कई विशेषताओं को तय करते हैं, जो माता-पिता से मिलते हैं।महिलाओं में दो X क्रोमोजोम होते हैं, जबकि पुरुषों में एक X और एक Y क्रोमोजोम होता है।वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार X क्रोमोजोम में इम्यून सिस्टम से जुड़े सबसे ज्यादा जीन पाए जाते हैं।
इसके अलावा प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन जैसे हार्मोन इम्यून सिस्टम की गतिविधि को कुछ हद तक सीमित कर सकते हैं। ये हार्मोन महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन अधिक होता है, जो खासकर गर्भावस्था के समय ज्यादा सक्रिय होकर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है। मासिक धर्म के दौरान भी शरीर में इसी तरह की प्रक्रिया देखी जाती है।
4. चीजें ढूंढने और याद रखने में महिलाएं बेहतर
महिलाओं की विजुअल मेमोरी पुरुषों की तुलना में बेहतर होती है।स्विट्जरलैंड के शोधकर्ताओं ने 10 लाख लोगों पर एक बड़ा अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि महिलाएं बातचीत याद रखने, चेहरों को पहचानने और चीजें ढूंढने में पुरुषों से बेहतर होती हैं। हालांकि रास्ते याद रखने में पुरुष थोड़े बेहतर पाए गए।
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. रिकी एरेन्सन के अनुसार ब्रेन की MRI से पता चलता है कि जब पुरुष किसी काम पर ध्यान देते हैं तो उनके दिमाग का एक ही हिस्सा ज्यादा सक्रिय होता है।इसके विपरीत महिलाएं किसी एक काम पर ध्यान देते समय भी दिमाग के कई हिस्सों का एक साथ उपयोग करती हैं।
डॉ. एरेन्सन बताते हैं कि अधिकतर पुरुष अपने विचारों को अलग-अलग हिस्सों में व्यवस्थित करके सोचते हैं, जबकि महिलाएं एक के बाद एक कई चीजों के बारे में तेजी से सोच सकती हैं।
Women’s Day Special: बारीकी से ध्यान देने में भी महिलाएं आगे
हैदराबाद के जनरल फिजिशियन डॉ. हिरेन रेड्डी के अनुसार पुरुषों में कभी-कभी ध्यान भटकने की समस्या ज्यादा हो सकती है। वे व्यापक नजरिए से चीजों को देखते हैं और कई बार सामने मौजूद चीज भी नजरअंदाज कर देते हैं।इसके विपरीत महिलाएं छोटी-छोटी बातों और बारीकियों पर ज्यादा ध्यान देती हैं, खासकर उन जगहों पर जहां वे ज्यादा समय बिताती हैं, जैसे घर, अलमारी, कमरा या किचन।
विशेषज्ञों के अनुसार प्राचीन समय में पुरुष मुख्य रूप से शिकार के लिए बाहर जाते थे, जबकि घर और परिवार की जिम्मेदारी महिलाओं के पास होती थी। इसी कारण महिलाओं में दूसरों की भावनाओं को समझने, छोटी-छोटी चीजों को याद रखने और वातावरण पर ध्यान देने की क्षमता अधिक विकसित हो गई।
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