ख़बर का असर

Home » धर्म » नवरात्रि Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलेगा ज्ञान और संयम का वरदान, जानें विधि-मुहूर्त

नवरात्रि Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलेगा ज्ञान और संयम का वरदान, जानें विधि-मुहूर्त

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, सही मुहूर्त, मंत्र जप और भोग अर्पित करने से भक्तों को ज्ञान, संयम और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

Navratri Day 2: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। वर्ष 2026 में यह दिन 20 मार्च को पड़ रहा है। मां ब्रह्मचारिणी को तप, संयम और ज्ञान की देवी माना जाता है। इस दिन उनकी विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को धैर्य, आत्मबल और ज्ञान की प्राप्ति होती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस दिन पूजा कैसे करें, शुभ समय क्या है, कौन से मंत्र जपें और क्या भोग लगाएं।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि

नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें। इस दिन पीले या सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके वहां धूप और दीप जलाएं।अब मां ब्रह्मचारिणी की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर पूजा शुरू करें। पूजा में सफेद फूल, चंदन, रोली और अक्षत अर्पित करें।
पूजा करते समय ‘ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः’ मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। इसके बाद माता की कथा पढ़ें या सुनें और अंत में आरती करके पूजा समाप्त करें।

Navratri Day 2: पूजा के शुभ मुहूर्त (20 मार्च 2026)

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:08 से 05:55 तक

  • प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:31 से 06:43 तक

  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:22 से 01:10 तक

  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:47 से 07:11 तक

  • सायाह्न सन्ध्या: शाम 06:49 से 08:01 तक

इन समयों में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

मां ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के मंत्र

  • दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

  • या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

  • ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।

  • तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्।

  • ॐ दुं दुर्गायै नमः।

इन मंत्रों का जप करने से मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

Navratri Day 2: मां ब्रह्मचारिणी का भोग

माता को प्रसन्न करने के लिए शक्कर, मिश्री, खीर और दूध का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

नवरात्रि के दूसरे दिन का रंग

इस दिन का शुभ रंग हरा है। हरा रंग प्रकृति, विकास, शांति और नई शुरुआत का प्रतीक होता है। शुक्रवार को इस रंग का उपयोग करने से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

Navratri Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

मां ब्रह्मचारिणी की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ था। नारद जी के कहने पर उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की।कहा जाता है कि शुरुआत में उन्होंने हजारों वर्षों तक केवल फल और फूल खाकर जीवन बिताया। इसके बाद सौ वर्षों तक उन्होंने जमीन पर रहकर तप किया। फिर कई वर्षों तक केवल बिल्वपत्र खाकर भगवान शिव की साधना की।

तपस्या के अंतिम चरण में उन्होंने बिल्वपत्र भी छोड़ दिए और बिना अन्न-जल के कठोर तप किया। पत्तों का त्याग करने के कारण उन्हें अपर्णा भी कहा जाता है।उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ऋषि के रूप में उनके सामने आए और उनकी परीक्षा ली। लेकिन मां अपने संकल्प पर अडिग रहीं। अंत में शिव जी ने उन्हें वर दिया कि वे उन्हें पति के रूप में प्राप्त होंगी।

इस प्रकार मां ब्रह्मचारिणी की तपस्या सफल हुई। वे तप, त्याग, संयम और दृढ़ निश्चय की प्रतीक मानी जाती हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों को भी यही गुण प्राप्त होते हैं।

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

Share this post:

खबरें और भी हैं...

Live Video

लाइव क्रिकट स्कोर

Khabar India YouTubekhabar india YouTube poster

राशिफल