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Bengal Election: ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप, मतदाता सूची में हेरफेर का दावा

Bengal Election:

Bengal Election: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखे पत्र में दावा किया है कि चुनाव आयोग भाजपा के साथ मिलकर मतदाता सूची में हेरफेर कर रहा है। इस मुद्दे ने चुनाव से पहले राज्य की सियासत को और गरमा दिया है।

मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप

ममता बनर्जी ने अपने पत्र में कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया ने लाखों लोगों को परेशानी में डाल दिया है और कई लोग मताधिकार से वंचित होने के कगार पर हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस प्रक्रिया के दौरान 200 से अधिक लोगों की जान चली गई, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वह एक संवैधानिक संस्था होने के बावजूद लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर कर रहा है।

Bengal Election: भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत का दावा

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा के एजेंटों द्वारा बड़ी संख्या में फॉर्म 6 आवेदन जमा किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य गैर-निवासियों को मतदाता सूची में शामिल करना हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का सुनियोजित प्रयास है। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि इस तरह के मामले पहले बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों में चुनाव से पहले देखे जा चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला

ममता बनर्जी ने पत्र में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े मामलों का निपटारा न्यायिक अधिकारियों द्वारा किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई थी और उसमें करीब 60 लाख मामले विचाराधीन हैं। इसके बावजूद लगभग 30 हजार नए आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन पर विचार किया जाना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के खिलाफ है।

Bengal Election: पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से अपील की कि मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद नए आवेदनों पर विचार न किया जाए। उन्होंने कहा कि बिना सभी राजनीतिक दलों को जानकारी दिए ऐसे आवेदनों को स्वीकार करना पूरी तरह अनुचित और असंवैधानिक है। ममता बनर्जी ने इस पूरे मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि जनता के मतदान अधिकार सुरक्षित रह सकें। इस आरोप के बाद चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी घमासान और तेज होने की संभावना है।