US Israel Vs Iran War: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर वह ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को समाप्त करने का निर्णय लेते हैं, तो इजराइल भी उनके कहने पर तुरंत हमले बंद कर देगा। उन्होंने टाइम मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा कि इजराइल ने हमेशा उनका साथ दिया है और वह उनके फैसलों का सम्मान करता है।
ट्रम्प ने कहा,“वे वही करेंगे जो मैं कहूंगा। वे अच्छे सहयोगी रहे हैं। अगर मैं रुकने का फैसला करता हूं, तो वे भी रुक जाएंगे। यदि उन्हें उकसाया नहीं गया तो वे निश्चित रूप से हमला बंद कर देंगे।”
नेतन्याहू के पास ट्रम्प के समर्थन के बिना कम विकल्प
टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास ट्रम्प के समर्थन के बिना ज्यादा विकल्प नहीं बचते। दूसरी तरफ ईरान की सेना ने स्पष्ट कहा है कि यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक उसके विरोधी आत्मसमर्पण नहीं कर देते।

US Israel Vs Iran War: UNSC में होर्मुज की सुरक्षा को लेकर वोटिंग
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में शुक्रवार को बहरीन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर मतदान होना है। इस प्रस्ताव में देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने की अनुमति देने की बात कही गई है।
बहरीन के विदेश मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार को सुरक्षित रखना और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक में किसी भी तरह की बाधा को रोकना है।
US Israel Vs Iran War: होर्मुज संकट में हमारे नाविक मारे गए
ब्रिटेन की पहल पर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से सुरक्षित बनाने के लिए गुरुवार को एक ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 60 से अधिक देशों ने भाग लिया। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी इसमें शामिल हुए।
बैठक में उन्होंने बताया कि इस संकट में अब तक केवल भारत के ही नागरिकों की मौत हुई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब तक तीन भारतीय नाविक मारे जा चुके हैं, जो विदेशी जहाजों पर काम कर रहे थे।
भारत ने कहा कि इस पूरे संकट का समाधान केवल शांति और बातचीत से ही संभव है। भारत ने सभी देशों से तनाव कम करने और संवाद के माध्यम से रास्ता निकालने की अपील की।
US Israel Vs Iran War: डील नहीं हुई तो वाइस प्रेसिडेंट को दोष दूंगा
व्हाइट हाउस में आयोजित ईस्टर लंच के दौरान ट्रम्प ने मजाक करते हुए कहा कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं होता है तो वह इसके लिए उपराष्ट्रपति जेडी वैंस को जिम्मेदार ठहराएंगे। वहीं अगर समझौता हो जाता है तो उसका पूरा श्रेय वह खुद लेंगे।
ट्रम्प ने ईरान को नई चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने अभी तक ईरान के बचे हुए ढांचे को पूरी तरह निशाना बनाना शुरू भी नहीं किया है।
उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि दुनिया की सबसे ताकतवर सेना अभी ईरान में मौजूद कई संरचनाओं को नष्ट करना बाकी है। उन्होंने कहा कि अगला लक्ष्य पुल हो सकते हैं और उसके बाद बिजली उत्पादन केंद्रों को निशाना बनाया जा सकता है।उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के नए नेतृत्व को जल्द फैसला करना चाहिए कि उन्हें क्या करना है।
अमेरिकी सेना का दावा- ड्रोन सामग्री रोकने के लिए पुल पर हमला
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जिस पुल पर हमला किया गया, उसका उद्देश्य ड्रोन बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की सप्लाई रोकना था।ट्रम्प ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर ईरान अमेरिका के 15 बिंदुओं वाले प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज कर दी जाएगी।
हालांकि यह हमला विवादों में भी है। ईरान का कहना है कि यह एक सिविलियन पुल था और इसे नष्ट करना युद्ध अपराध है। वहीं अमेरिका का दावा है कि इस पुल का इस्तेमाल ईरानी सेना ड्रोन बनाने के लिए जरूरी सामान ले जाने में कर रही थी।

US Israel Vs Iran War: होर्मुज में जहाज तय रास्ते से हटकर चल रहे
होर्मुज स्ट्रेट में ओमान के तीन जहाज ईरान द्वारा तय किए गए समुद्री कॉरिडोर से हटकर गुजरते हुए देखे गए हैं। यह जानकारी शिपिंग जर्नल लॉयड्स लिस्ट ने ट्रैकिंग डेटा के आधार पर दी।
इन जहाजों में दो बड़े तेल टैंकर और एक LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) ले जाने वाला जहाज शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार ये जहाज ओमान के तट के काफी करीब से गुजर रहे हैं।
अगर यह काफिला सुरक्षित तरीके से स्ट्रेट पार कर लेता है, तो लगभग तीन हफ्तों में पहली बार ऐसा होगा जब कोई ट्रैक किया गया जहाज ईरान के तय मार्ग का इस्तेमाल किए बिना इस रास्ते से गुजरेगा।
ईरान में ₹3,800 करोड़ का पुल तबाह
गुरुवार को अमेरिका ने ईरान की राजधानी तेहरान को कराज शहर से जोड़ने वाले B1 हाईवे ब्रिज पर हवाई हमला किया। ईरानी समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक इस हमले में कई लोग घायल हुए हैं।
यह पुल इसी साल बनाया गया था और इसे मिडिल ईस्ट का सबसे ऊंचा पुल माना जाता है। इसकी लंबाई करीब 1050 मीटर और ऊंचाई 136 मीटर है। इसे बनाने में लगभग 400 मिलियन डॉलर (करीब ₹3,800 करोड़) खर्च हुए थे।
ट्रम्प ने कहा कि अब ईरान इस पुल का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा और अभी भी उसके पास समझौता करने का समय है, वरना आगे और नुकसान हो सकता है।
ऑस्ट्रिया ने अमेरिका को एयरस्पेस देने से मना किया
ऑस्ट्रिया ने गुरुवार को अमेरिका को अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया। ऑस्ट्रिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उनका देश तटस्थ नीति अपनाता है, इसलिए वह किसी युद्ध में सीधे शामिल नहीं हो सकता।इससे पहले स्पेन, फ्रांस और इटली भी अमेरिका को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति देने से मना कर चुके हैं।
US Israel Vs Iran War: अमेरिका में बड़ा सैन्य फैसला
ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच अमेरिका में एक बड़ा सैन्य निर्णय लिया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने आर्मी चीफ जनरल रैंडी जॉर्ज से पद छोड़ने को कहा है।पेंटागन के एक अधिकारी के मुताबिक जॉर्ज को तय समय से पहले रिटायर होने के लिए कहा गया है। वह अगस्त 2023 से आर्मी चीफ ऑफ स्टाफके पद पर थे।
हेगसेथ के पद संभालने के बाद अब तक एक दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ जनरल और एडमिरल को हटाया जा चुका है, और जॉर्ज का हटाया जाना भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।रैंडी जॉर्ज वेस्ट पॉइंट मिलिट्री अकादमी के ग्रेजुएट हैं और एक इन्फैंट्री अधिकारी के रूप में काम कर चुके हैं। उन्होंने खाड़ी युद्ध, इराक और अफगानिस्तान में भी सेवा दी है।

खुफिया रिपोर्ट- ईरान की आधी सैन्य क्षमता अब भी बची
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच हफ्तों से अमेरिका और इजराइल के लगातार हमलों के बावजूद ईरान के करीब आधे मिसाइल लॉन्चर अब भी सुरक्षित हैं। इसके अलावा उसके पास हजारों वन-वे अटैक ड्रोन भी मौजूद हैं।
सूत्रों के मुताबिक इन आंकड़ों में ऐसे लॉन्चर भी शामिल हो सकते हैं जो हमलों के बाद जमीन के नीचे दब गए हैं और फिलहाल इस्तेमाल में नहीं हैं, लेकिन पूरी तरह नष्ट भी नहीं हुए।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान की लगभग 50% ड्रोन क्षमता अभी भी बची हुई है। साथ ही उसके कई तटीय रक्षा क्रूज मिसाइल भी सुरक्षित हैं।
अमेरिका ने अपने हवाई हमलों में तटीय ठिकानों को ज्यादा निशाना नहीं बनाया, हालांकि जहाजों पर हमले किए गए हैं। यही मिसाइलें ईरान को होर्मुज में जहाजों के लिए बड़ा खतरा बनाने की क्षमता देती हैं।
US Israel Vs Iran War: ईरानी सेना का बयान
ईरान की सेना ने स्पष्ट कहा है कि यह युद्ध तब तक खत्म नहीं होगा जब तक उसके विरोधी आत्मसमर्पण नहीं कर देते।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि वे पूरी ताकत के साथ लड़ाई जारी रखेंगे और किसी भी दबाव के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी भी दी है कि अगर उसने जमीनी हमला करने की कोशिश की, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार ऐसी स्थिति में दुश्मन के सैनिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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