Iran crisis: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग अब खाड़ी देशों के लिए भी बड़ा खतरा बनती जा रही है। शुक्रवार को कुवैत ने पुष्टि की कि ईरान के हमले में उसके एक डीसैलिनेशन प्लांट (समुद्र के पानी को पीने योग्य बनाने वाला संयंत्र) को नुकसान पहुंचा है। इससे पहले सुबह एक तेल रिफाइनरी को ड्रोन से निशाना बनाया गया था। हालांकि कुवैत ने नुकसान की पूरी जानकारी साझा नहीं की, लेकिन साफ है कि हमले का असर जरूरी ढांचे पर पड़ा है।
पानी के प्लांट बने नए टारगेट
खाड़ी देशों में डीसैलिनेशन प्लांट जीवनरेखा माने जाते हैं, क्योंकि यहां पीने के पानी का बड़ा हिस्सा इसी प्रक्रिया से आता है। कुवैत में करीब 90% पानी इन्हीं प्लांट्स से मिलता है। ऐसे में इन पर हमला सीधे आम जनता को प्रभावित करता है। जंग की शुरुआत में ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर ऐसे प्लांट्स को निशाना बनाने का आरोप लगाया था, लेकिन अब खुद ईरान भी इन्हें टारगेट कर रहा है।
Iran crisis: आम लोगों के लिए बढ़ा संकट
इन हमलों का सबसे बड़ा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। अगर डीसैलिनेशन प्लांट लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं, तो पानी की भारी कमी हो सकती है। इसके अलावा जंग का असर खाने-पीने की चीजों पर भी पड़ रहा है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
Iran crisis: संयुक्त राष्ट्र ने पहले ही खाद्य संकट को लेकर चेतावनी दी है। Food and Agriculture Organization के फूड प्राइस इंडेक्स के मुताबिक मार्च में वैश्विक खाद्य कीमतें लगातार दूसरे महीने बढ़ी हैं और दिसंबर के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। इंडेक्स फरवरी के मुकाबले 2.4% बढ़कर 128.5 पॉइंट पर पहुंच गया है। अगर जंग ऐसे ही बढ़ती रही, तो इसका असर सिर्फ खाड़ी देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया में पानी और खाने के संकट को और गहरा सकता है।







