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देवास कलेक्ट्रेट में बड़ा फर्जीवाड़ा: कलेक्टर के नाम पर बनते थे फर्जी आदेश

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Mp news: मध्य प्रदेश के देवास कलेक्ट्रेट से एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है, जहां कलेक्टर के नाम का दुरुपयोग कर आदिवासी जमीनों की अवैध बिक्री की जा रही थी। इस पूरे खेल में प्रशासन के ही कुछ कर्मचारी और एक दलाल शामिल थे, जिन्होंने मिलकर फर्जी आदेश तैयार कर जमीनों का सौदा कराया।

रजिस्ट्री के दौरान खुली पोल

मामले का खुलासा तब हुआ जब एक व्यक्ति जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचा और दस्तावेजों में गड़बड़ी नजर आई। शक होने पर जिला पंजीयक ने इसकी जानकारी कलेक्टर ऋतुराज सिंह को दी। इसके बाद जांच शुरू हुई, जिसमें फर्जी सील और हस्ताक्षर के जरिए जमीन ट्रांसफर की अनुमति जारी करने का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया।

Mp news: कैसे चलता था पूरा खेल

जानकारी के मुताबिक, आदिवासी जमीन बेचने के लिए कलेक्टर की अनुमति जरूरी होती है। इसी नियम का फायदा उठाकर आरोपियों ने कलेक्टर के नाम से फर्जी आदेश तैयार किए और जमीनों की बिक्री कराई। इस पूरे नेटवर्क में एडीएम कार्यालय का रीडर, नजूल शाखा और तहसील के कर्मचारी शामिल थे, जो लंबे समय से इस अवैध काम को अंजाम दे रहे थे।

आरोपियों की गिरफ्तारी

Mp news: मामले के सामने आते ही बीएनपी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संजीव जाटव, रमेश लोबानिया, जितेंद्र भद्रे और महेंद्र कुशवाह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश जारी है।

 

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