LPG Tanker: पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने समुद्री और हवाई संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि हालात सामान्य बने हुए हैं। सरकार के अनुसार, देश के सभी बंदरगाह सुचारु रूप से काम कर रहे हैं और कहीं भी जाम या बाधा की स्थिति नहीं है। साथ ही, भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी और समन्वय किया जा रहा है।
समुद्री सुरक्षा पर सतत निगरानी
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि पर्शियन गल्फ क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। मंत्रालय विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशनों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग का नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे सक्रिय है, जिसने अब तक हजारों कॉल और ईमेल का जवाब दिया है। पिछले 24 घंटों में भी बड़ी संख्या में कॉल और संदेश प्राप्त हुए हैं, जिनका तुरंत समाधान किया गया। मंत्रालय के अनुसार, हाल के दिनों में किसी भी भारतीय जहाज से जुड़ी कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई है।
LPG Tanker: नाविकों की सुरक्षित वापसी और राहत कार्य
सरकार ने बताया कि अब तक 2,729 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है, जिनमें से 49 लोग पिछले 24 घंटों में लौटे हैं। इसके अलावा, ईरान से भी बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया है। अब तक 2,432 भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र और मछुआरे शामिल हैं। सरकार का कहना है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए विशेष नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन सेवाएं लगातार सक्रिय हैं।
उड़ानों और आपूर्ति व्यवस्था की स्थिति
हवाई सेवाओं की बात करें तो स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। 28 फरवरी से अब तक लाखों यात्री खाड़ी क्षेत्र से भारत लौट चुके हैं। संयुक्त अरब अमीरात से प्रतिदिन बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित हो रही हैं, जबकि सऊदी अरब और ओमान से भी नियमित उड़ानें जारी हैं। कतर और कुवैत का एयरस्पेस आंशिक रूप से खुल चुका है और जल्द ही पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है। बहरीन और इराक से भी सीमित उड़ानें संचालित हो रही हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी बंदरगाहों पर सामान की आवाजाही सामान्य बनी हुई है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता में किसी प्रकार की कमी नहीं है।
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