Middle East War: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। परमाणु समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी कूटनीतिक बातचीत के बीच अमेरिका ने ईरान के दो द्वीपों पर सैन्य कार्रवाई की है। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी हमला कर क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
अमेरिका ने क्यों किए हमले?
अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने गोरुक और क़ेशम द्वीप स्थित ईरानी रडार, ड्रोन नियंत्रण और कमांड सेंटरों पर हमले किए। CENTCOM का दावा है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उड़ान भर रहे एक अमेरिकी MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को मार गिराया गया था।
Middle East War: ड्रोन और नियंत्रण केंद्र किए गए नष्ट
CENTCOM के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, एक ग्राउंड कंट्रोल सेंटर और दो आक्रामक ड्रोन को नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेना ने कहा कि इस अभियान में उसका कोई सैनिक हताहत नहीं हुआ।
ईरान ने किया पलटवार
अमेरिकी हमलों के बाद Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स ने जवाबी कार्रवाई की। ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिणी होर्मोज़गान प्रांत के सिरिक द्वीप क्षेत्र में स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया। ईरान ने दावा किया कि उसका हमला सफल रहा और लक्ष्य को नुकसान पहुंचाया गया।
बातचीत के बीच बढ़ा तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और Strait of Hormuz को लेकर बातचीत जारी है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया था कि दोनों देश संभावित समझौते के काफी करीब हैं।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच ताजा सैन्य कार्रवाई से कूटनीतिक प्रयासों को झटका लग सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है।फिलहाल दोनों देशों की ओर से हालात पर नजर रखी जा रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय तनाव कम करने और बातचीत जारी रखने की अपील कर रहा है।
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