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ट्रंप के सामने ईरान युद्ध से बाहर निकलने की चुनौती, खुद ही पैदा की समस्या

Washington: ट्रंप के सामने ईरान युद्ध से बाहर निकलने की चुनौती, खुद ही पैदा की समस्या
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय एक साथ कई मोर्चों पर जूझ रहे हैं।यह समस्या उन्होंने खुद ही पैदा की है। देश में इस समय मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं, लेकिन ट्रंप की लोकप्रियता रेटिंग ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर है।चुनावों से पहले आर्थिक बोझ और बढ़ती महंगाई के कारण लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।
अमेरिकी न्यूज चैनल CNN  के अनुसार ट्रम्प के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईरान युद्ध से बाहर निकलने का ऐसा रास्ता खोजना है जिससे अमेरिका मजबूत हो और ईरान कमजोर हो, क्योंकि अमेरिका और इजरायल के तमाम हमले ईरान का मनोबल गिराने में असफल रहे हैं।
ईरान के साथ बढ़ते टकराव और सैन्य संघर्ष ने मध्य पूर्व में संकट पैदा कर दिया है। युद्ध की स्थिति के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में अस्थिरता है, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
 राजनीतिक चुनौतियां
राजनीतिक जानकारों के अनुसार ट्रंप अमेरिका के भीतर अपने खिलाफ बढ़ रही नाराजगी और राजनीतिक चुनौतियों को भलीभांति समझ रहे हैं, यही वजह वे निरंतर ईरान को धमकाने की रणनीति अपनाए हुए हैं और अपने देशवासियों को बराबर संदेश दे रहे हैं कि ईरान समझौता चाहता है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फिर कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है। उन्होंने सोशल प्लेटफॉर्म पर इसे लेकर अपना बयान जारी किया। इसमें लिखा है, ‘ईरान समझौता चाहता है,’ और यह ‘अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए अच्छा होगा।’
ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पोस्ट में विपक्षी डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन नेताओं पर भी निशाना साधा और बयानबाजी को वार्ता का रोड़ा बताया।
उन्होंने लिखा, “डेमोक्रेट्स और कुछ ऐसे रिपब्लिकन (जो देशभक्ति से रहित प्रतीत होते हैं) यह नहीं समझते कि जब राजनीतिक लोग लगातार नकारात्मक टिप्पणियां करते रहते हैं जैसे मुझे तेजी से आगे बढ़ना चाहिए, धीमे चलना चाहिए, युद्ध करना चाहिए, नहीं करना चाहिए, या कुछ और तो मेरे लिए अपना काम ठीक तरह से करना और बातचीत करना कहीं अधिक कठिन हो जाता है?”

Washington:  जन विश्वास बनाए रखने की चुनौती

ट्रंप ने लोगों से संयंम बरतने की अपील करते हुए उम्मीद जताई की सब सकारात्मक तरीके से संपन्न होगा। उन्होंने कहा, “बस आराम से बैठिए, आखिर में सब अच्छा होगा। हमेशा ऐसा ही होता है।”

हालांकि ट्रंप की इस पोस्ट में सेंट्रल कमांड के आत्मरक्षा में किए गए नवीनतम हमले और आईआरजीसी के जवाबी हमले का जिक्र नहीं है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड, यानी सेंटकाम ने सोमवार को ही बताया कि उसने ईरान के गोरुक शहर और केश्म द्वीप पर आत्मरक्षा में हमले किए हैं। एक्स पर जारी बयान में कहा गया कि यह कार्रवाई ईरान की आक्रामक गतिविधियों के जवाब में की गई। अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान ने इससे पहले अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक एमक्यू1 ड्रोन को गिराया था।

सेंटकाम के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और दो वन-वे अटैक ड्रोन नष्ट किए। दावा है कि ये ड्रोन क्षेत्रीय समुद्री रास्तों से गुजर रहे जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रहे थे।

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