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कॉकरोच की अराजकता, जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन की जिद क्यों? 

Opinion: कॉकरोच की अराजकता, जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन की जिद क्यों? 
Opinion: कॉकरोच की अराजकता, जंतर-मंतर पर बिना अनुमति प्रदर्शन की जिद क्यों? 
Opinion: लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का सबको अधिकार है।भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1) (ए) राष्ट्र के नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण ढंग से विरोध-प्रदर्शन का मौलिक अधिकार प्रदान करता है, लेकिन विरोध-प्रदर्शन के नाम पर अराजकता का माहौल बनाने की कोशिश कदापि बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नेताओं के आचरण से तो यही लगता है कि वे अराजकता का माहौल बना रहे हैं। आखिर बिना अनुमति जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की जिद पर अड़े रहना अराजकता नहीं तो और क्या है? खास बात यह है कि एक तो अराजकता और ऊपर से यह घमंड भी कि हमारे नेताओं को हिरासत में क्यों लिया जा रहा है?  यह तो वही बात हुई कि “चित भी मेरी, पट भी मेरी, अंटा मेरे बाप का।”

क्या सारे कायदे-कानून CJP के हिसाब से चलेंगे?

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि पुलिस-प्रशासन ने नियमानुसार प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है, तो ऐसा प्रदर्शन या सभा कानूनी रूप से अवैध मानी जाती है। सवाल यह है कि यदि सीजेपी को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना था तो उसके नेताओं ने समय पर प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं ली? क्या उन्हें पता नहीं था कि नियमानुसार प्रदर्शन से कितने दिन पहले अनुमति ली जानी चाहिए?  जब दिल्ली में जंतर-मंतर या अन्य अधिकृत स्थलों पर प्रदर्शन की अनुमति के लिए 10 दिन पहले आवेदन करना अनिवार्य होता है, तो फिर सीजेपी नेताओं ने प्रदर्शन से महज तीन दिन पहले यानी 7 अक्टूबर को आवेदन क्यों किया? कहां सोये हुए थे वे? क्या सारे कायदे-कानून उनके हिसाब से ही चलेंगे?

क्या पुलिस तमाशीन बनी रहे?

जहां तक सीजेपी नेताओं को हिरासत में लिये जाने की बात है, तो बिना अनुमति के किसी ऐसे क्षेत्र में जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 या निषेधाज्ञा लागू हो, वहां प्रदर्शन के लिए जुटना कानून का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में पुलिस को आयोजकों या प्रदर्शनकारियों को रोकने, हटाने या हिरासत में लेने का अधिकार होता है। क्या निषेधाज्ञा के उल्लंघन पर पुलिस को तमाशीन बने रह जाना चाहिए? सवाल उठ सकते हैं कि जिस पार्टी के नेता अनुशासन में न हों, जो बिना अनुमति के प्रदर्शन की जिद पर अड़े हुए हों, उनसे पुलिस-प्रशासन कैसे उम्मीद कर सकता था कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकेगा?  ऐसे में पुलिस ने किसी उग्र प्रदर्शन, सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान या भीड़ के अनियंत्रित होने की आशंका को देखते हुए एहतियात के तौर पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लिया तो क्या कोई गुनाह कर दिया?  जंतर मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे जिन 300 के करीब प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है, पुलिस का दावा है कि उनमें एक प्रतिशत भी छात्र नहीं हैं।ये सभी विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता और मजदूर हैं। 

Opinion: कॉकरोच की निष्ठा किधर है?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नेताओं ने बिना अनुमति प्रदर्शन की जो जिद की उससे तो ऐसा लगता है कि उनकी निष्ठा किसी ऐसी राजनीतिक पार्टी के प्रति है, जो उनका इस्तेमाल अपने हितों की पूर्ति के लिए करना चाहती है।यदि ऐसा नहीं है, तो व्यवस्था में बदलाव की बात करने वाले कॉकरोच क्यों राष्ट्रीय राजनीति में विकल्प देने से कतराते रहे हैं? उन्हें समझना होगा कि जनता की समस्याओं के समाधान और व्यवस्था में बदलाव के लिए राजनीतिक विकल्प जरूरी होता है। कॉकरोच किसी भी तरह की गलतफहमी से बाहर निकलें।शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सरकार ने युवा पीढ़ी की भावनाओं के सम्मान में करवाया, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा आसान नहीं है।