Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना (UBT) के प्रमुख नेता उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ‘गद्दार’ बताते हुए चुनाव आयोग द्वारा महाराष्ट्र में मतदाताओं की कुल संख्या को लेकर जारी आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। ठाकरे ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूछा कि आखिर महाराष्ट्र में लाखों मतदाता कहां गायब हो गए?
Uddhav Thackeray: मतदाता सूची के आंकड़ों में अंतर पर उठाए सवाल-
उद्धव ठाकरे के अनुसार, भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने 26 मई 2026 को महाराष्ट्र में मतदाताओं की कुल संख्या 9,86,44,413 बताई थी। वहीं, 31 अगस्त को यह संख्या घटकर 9,78,54,049 रह गई। ठाकरे ने दोनों आंकड़ों का हवाला देते हुए सवाल किया कि आखिर मतदाताओं की संख्या में लगभग 7.90 लाख का अंतर कैसे आया?
Uddhav Thackeray: उद्धव ठाकरे का दावा, वर्ली में एक ही पते पर हजारों मतदाता-
शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि मुंबई के वर्ली विधानसभा क्षेत्र में लगभग 24 हजार फर्जी मतदाता पंजीकृत हैं। उन्होंने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ चुनिंदा मतदाताओं के आंकड़ों में बदलाव करना अलग बात है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर मतदाताओं की संख्या में अंतर कैसे आ सकता है? ठाकरे ने यह भी दावा किया कि एक ही इमारत के पते पर हजारों मतदाता पंजीकृत हैं। उन्होंने इस मामले की जांच की जरूरत पर जोर दिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए।
SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम कैसे हटाए जाते हैं?-
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची का सत्यापन करता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और उसमें मौजूद गलतियों को दूर करना है। इसके तहत मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए लोगों और एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है।
इस प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर सकते हैं। यदि किसी मतदाता का नाम सूची में गलत पाया जाता है या उसके पंजीकरण को लेकर कोई आपत्ति सामने आती है, तो संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाती है। हालांकि, सत्यापन के दौरान किसी मतदाता का पता नहीं चलने भर से उसका नाम अपने आप हटाया जाना उचित नहीं है। नाम हटाने से पहले लागू नियमों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
यदि किसी योग्य मतदाता का नाम मतदाता सूची से हट जाता है, तो वह संबंधित निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों के अनुसार नाम जुड़वाने या सुधार कराने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है।
भिवंडी विधानसभा का भी दिया हवाला-
उद्धव ठाकरे ने अपने आरोपों के समर्थन में भिवंडी विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों का भी हवाला दिया। उनके अनुसार, वर्ष 2024 में भिवंडी विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,73,659 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 1,91,691 लोगों ने मतदान किया था। ठाकरे ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के बाद मतदाताओं की कुल संख्या 1,91,693 बताई गई। उन्होंने इन आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूची में कथित विसंगतियों पर सवाल उठाए और पूछा कि आखिर इन आंकड़ों के बीच इतना अंतर कैसे सामने आया।
उद्धव ठाकरे -‘ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा’-
उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं और अब उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। ठाकरे ने बिहार में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया और फॉर्म-6 से जुड़े कथित बदलावों को लेकर भी सवाल उठाए। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के सांसदों की ओर से चुनावी गड़बड़ियों, ‘वोट चोरी’ और कथित मिलीभगत को लेकर लगाए गए आरोपों का हवाला दिया। उद्धव ठाकरे का कहना है कि इन विवादों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष और संबंधित आंकड़ों की स्वतंत्र जांच भी जरूरी है।









