Home » एक्सप्लनेर » मणिपुर में नागा-कुकी तनाव फिर बढ़ा: 5 की मौत, घर-दुकानें आग के हवाले; क्या है पूरा मामला?

मणिपुर में नागा-कुकी तनाव फिर बढ़ा: 5 की मौत, घर-दुकानें आग के हवाले; क्या है पूरा मामला?

Manipur Violence: मणिपुर के कामजोंग और उखरुल जिलों में एक बार फिर हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। गोलीबारी और घात लगाकर किए गए हमलों में पांच लोगों की मौत की खबर है। चस्साद में करीब 10 घरों और 20 दुकानों को आग के हवाले किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू की है। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने राज्य में हिंसा से सात लोगों की मौत होने का दावा किया है। ऐसे में सवाल है कि मणिपुर में ताजा हिंसा कहां हुई, कौन-कौन सी घटनाएं सामने आईं और प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?

मणिपुर में कहां-कहां हुई हिंसा?

मणिपुर के कामजोंग और उखरुल जिलों में शनिवार, 10 अक्टूबर को हिंसा की कई घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, कामजोंग जिले में संदिग्ध हथियारबंद लोगों की गोलीबारी में 23 वर्षीय माइकल न्गाममिनलेन हाओकिप की मौत हो गई। वहीं, उखरुल जिले में टीएम कासो के पास याओलेन के नजदीक घात लगाकर किए गए हमले में 40 वर्षीय संदीप राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

इसके अलावा, कामजोंग जिले में मणिपुर-म्यांमार सीमा के पास निंगचौ गांव में सुबह करीब 9:30 बजे दो नागा ग्रामीणों की हत्या की खबर सामने आई। मृतकों की पहचान 35 वर्षीय न्गाचान्सो निंगशेन और 48 वर्षीय लेशिशान लेशडांग के रूप में हुई है। इससे पहले कुकी समुदाय की महिला डोमखोनी टौथांग की भी गोली लगने से मौत हो गई थी।

Manipur Violence: 10 घर और 20 दुकानों को क्यों बनाया गया निशाना?

हिंसा के बीच चस्साद में करीब 10 घरों और 20 दुकानों को आग के हवाले किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में आगजनी के पीछे की वजह और इसमें शामिल लोगों की पहचान स्पष्ट नहीं की गई है। मणिपुर में नागा और कुकी समुदायों के बीच तनाव की खबरों के बीच इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। लेकिन किसी खास घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने से पहले जांच और प्रशासन की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

नागा-कुकी तनाव क्या है?

नागा और कुकी मणिपुर के अलग-अलग आदिवासी समुदाय हैं। राज्य में विभिन्न समुदायों के बीच भूमि, क्षेत्रीय पहचान, प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे लंबे समय से संवेदनशील रहे हैं। ऐसे माहौल में किसी हिंसक घटना के बाद तनाव बढ़ने और स्थानीय स्तर पर विरोध या बंद जैसी गतिविधियां होने की आशंका रहती है। हालांकि, मौजूदा घटनाओं के पीछे तत्काल कारण क्या है और किस घटना ने तनाव को बढ़ाया। इसलिए ताजा हिंसा को किसी एक कारण या पूरे समुदाय की कार्रवाई बताना उचित नहीं होगा। घटना की परिस्थितियों और जिम्मेदार लोगों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।

Manipur Violence
                                                      Manipur Violence
Manipur Violence: प्रशासन ने क्या पाबंदियां लगाईं?

हिंसा के बाद जिला प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू की है। रिपोर्ट के अनुसार, 9 अक्टूबर को कामजोंग के जिला मजिस्ट्रेट एल.एन. काशुंग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 163 के तहत आदेश जारी किया।इसके तहत संबंधित जंक्शन के 400 मीटर के दायरे में पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने, हथियार ले जाने और घरों से बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी दी गई है। ये पाबंदियां अगले आदेश तक लागू रहने की बात कही गई है। प्रशासन की ओर से इन कदमों का उद्देश्य क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।

हिंसा की घटनाओं के बीच कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी ने शनिवार शाम छह बजे से कांगपोकपी जिले में 24 घंटे के बंद का आह्वान किया है। यह कदम क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है। बंद का असर परिवहन, बाजार और आम लोगों की आवाजाही पर पड़ सकता है। हालांकि, बंद के दौरान सेवाओं की स्थिति और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों की पुष्टि स्थानीय प्रशासन की जानकारी से की जानी चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने क्या कहा?

मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने ताजा घटनाओं पर चिंता जताई है। उनके मुताबिक, राज्यभर में हिंसक घटनाओं में सात लोगों की मौत हुई है। उन्होंने कामजोंग जिले के निंगचौ गांव में हमलों, माकुई-इंफाल-तामेंगलोंग मार्ग और चस्साद में हिंसा का जिक्र किया। बीरेन सिंह ने कामजोंग में एक पुलिस स्टेशन को जलाए जाने की खबरों का भी उल्लेख किया। इसके अलावा, उनके अनुसार कांगपोकपी जिले के माकुई अशांग गांव के दो नागा निवासी लापता हैं।

Manipur Violence: आगे क्या?

फिलहाल सबसे अहम सवाल हिंसा की घटनाओं की जांच, मृतकों की अंतिम संख्या, लापता लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था का है। प्रशासन के सामने लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ तनाव को और बढ़ने से रोकने की चुनौती है।

मणिपुर की ताजा घटनाओं में मौतों के आंकड़े को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। ऐसे में आधिकारिक पुष्टि के बिना अंतिम संख्या तय मानना जल्दबाजी होगी। साथ ही, हिंसा के लिए जिम्मेदारी तय करने और उसके कारणों को समझने के लिए जांच के नतीजों का इंतजार करना जरूरी है।

ये भी पढ़े…लखनऊ में CJP प्रदर्शन की तैयारी, यूपी चुनाव से पहले आंदोलन, राजनीतिक एजेंडा और इसके पीछे की रणनीति पर सवाल