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राहुल गांधी, विरोध-प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट की फटकार, चिंतन का विषय है ये…

Opinion: राहुल गांधी, विरोध-प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट की फटकार, चिंतन का विषय है ये...
Opinion: राहुल गांधी, विरोध-प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट की फटकार, चिंतन का विषय है ये...

Opinion: राजनीति में अपनी बात को जोरदार ढंग से कहने के बहुत से तरीके हैं। राजनेताओं से संयम के साथ अपनी बात कहने की अपेक्षा की जाती है। आम आदमी की भूल को किसी हद तक नजरंदाज किया जा सकता है, लेकिन विपक्ष के नेता में तो लोग ‘छाया प्रधानमंत्री’ (Shadow Prime Minister) की छवि देखते हैं,  उनसे तो सदैव संयमित आचरण की ही अपेक्षा रखी जानी चाहिेए। कितने दुख की बात है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा विपक्ष के नेता राहुल गांधी को अपने आचरण के लिए स्पष्टीकरण देने की बात कहनी पड़ी। यह देश के लिए चिंतन का विषय है।

सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को क्यों लगाई फटकार?

दरअसल, राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के नेताओं ने SIR आदि से संबंधित मुद्दों को लेकर 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला और वहां भीड़ के साथ नारेबाजी की गई।इस मामले में कोर्ट ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को फटकराते हुए स्पष्ट तौर पर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता है।मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी के आचरण पर सवाल उठाए। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि राहुल गांधी को खुद के आचरण को लेकर सफाई देनी होगी। अब यह अलग बात है कि राहुल गांधी कोर्ट की फटकार को कितनी गंभीरता से लेते हैं। 

Opinion: सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष शक्ति प्रदर्शन!

समझ में नहीं आता कि विपक्ष के नेता को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष शक्ति प्रदर्शन की सलाह किसने दी? आखिर उनकी पार्टी में कानून के बड़े-बड़े जानकार हैं। कैसे मान लें कि उन्होंने अपने नेता को राय नहीं दी होगी कि कानूनी मामलों या याचिका पर विरोध दर्ज कराने के लिए स्थापित न्यायिक प्रक्रियाएं होती हैं, न कि अदालत तक भारी भीड़ लेकर शक्ति प्रदर्शन करना।विपक्ष के नेता ने जोश में जो अति उत्साह दिखाया उससे सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि न्यायपालिका को भीड़ या शक्ति प्रदर्शन के जरिए डराया या धमकाया नहीं जा सकता। कोर्ट का मानना है कि अदालत परिसर के पास दबाव बनाने वाले प्रदर्शन या मार्च न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और स्वतंत्रता को प्रभावित करने का प्रयास माने जा सकते हैं।

जनविश्वास बनाए रखना होगा

राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर इतने व्यग्र हैं कि कभी आकाशवाणी में जाकर धरना दे देते हैं और कभी उन्हें सर्वोच्च अदालत के सामने शक्ति प्रदर्शन की सूझती है। उन्हें तो बहुत संयम से आगे-पीछे देखकर कोई फैसला लेना चाहिए। उन्हें यह भी याद रहना चाहिए कि अप्रैल 2019 में ‘चौकीदार चोर है’ वाले बयान पर अवमानना याचिका के चलते उन्हें सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर खेद जताना पड़ा था। बाद में उन्होंने बिना शर्त माफी मांगते हुए मामला बंद करने का अनुरोध किया था। वे गलती पर गलती करते जाएंगे, तो लोग उनका विश्वास कैसे कर पाएंगे?
Opinion: प्रदर्शन की मर्यादा का ध्यान रखें

आम लोगों को भी विरोध- प्रदर्शनों के दौरान संयम का परिचय देना चाहिए। आश्चर्यजनक है कि इस बीच राजधानी दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने जो आचरण दिखाया, वह बड़ा हैरान करने वाला है। प्रदर्शनों के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता, गाली-गलौज और हाथापाई किसी भी दशा में जायज नहीं है। किसी कांस्टेबल को अकेला पाकर उसका कॉलर पकड़ना, उसकी वर्दी फाड़ डालना जैसी हरकतें क्या आंदोलनकारियों को शोभा देंगी?  किसी प्रदर्शनकारी का पुलिस पर लात मारना, गाली देना या वर्दी फाड़ना प्रदर्शन की मर्यादा और भावना के एकदम विपरीत है।

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