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फ्रांस में 8 लाख लोग सड़कों पर क्यों उतरे? महंगाई, स्कूलों की बदहाली और हिंसा का पूरा विश्लेषण समझिए

France Protest

France Protest: फ्रांस में महंगाई, वेतन, पेंशन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी पेरिस समेत कई शहरों में लाखों लोग सड़कों पर उतरे। कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसके बाद आगजनी, तोड़फोड़ और गिरफ्तारियों की घटनाएं सामने आईं। आखिर इस आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई और फ्रांस की सरकार के सामने कौन-सी चुनौतियां खड़ी हुईं? समझिए पूरी कहानी।

फ्रांस में लाखों लोगों का प्रदर्शन, कई शहरों में हिंसा

फ्रांस में 17 अक्टूबर 2026 को बढ़ती महंगाई, घटती क्रय शक्ति और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन हुए। राजधानी पेरिस समेत मार्सिले, लियोन, बोर्डो और लिमोज जैसे शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। ट्रेड यूनियन के मुताबिक, प्रदर्शन में करीब 8 लाख लोग शामिल हुए, जबकि सरकारी आंकड़ा लगभग 5.5 लाख था। अधिकांश मार्च शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। कई दुकानों, वाहनों और सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ तथा आगजनी की घटनाएं सामने आईं।

France Protest: स्कूलों की बदहाली से शुरू हुआ आंदोलन

इस आंदोलन की शुरुआत सितंबर 2026 में पेरिस के उपनगर क्रेतै के एक हाईस्कूल से हुई थी। 17 सितंबर को शिक्षक और छात्र स्कूलों में कर्मचारियों तथा संसाधनों की कमी के खिलाफ सामने आए। छात्रों की शिकायत थी कि कई स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं और अनुपस्थित शिक्षकों की जगह दूसरे शिक्षक उपलब्ध नहीं कराए जाते। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है और कई बार जरूरी विषयों की कक्षाएं भी रद्द करनी पड़ती हैं। भीड़भाड़ वाली कक्षाएं, पुरानी इमारतें और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने भी छात्रों की नाराजगी बढ़ाई। धीरे-धीरे यह विरोध दूसरे स्कूलों और विश्वविद्यालयों तक फैल गया।

महंगाई, वेतन और पेंशन भी बने बड़े मुद्दे

आंदोलन आगे बढ़ा तो इसमें केवल छात्र ही नहीं, बल्कि शिक्षक, कर्मचारी, मजदूर और अन्य सामाजिक समूह भी शामिल होने लगे। प्रदर्शनकारियों ने बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण, बेहतर वेतन, पेंशन में सुधार और सार्वजनिक सेवाओं के लिए पर्याप्त संसाधनों की मांग उठाई। ईंधन और रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ते खर्च के बीच लोगों की क्रय शक्ति का मुद्दा प्रमुख बन गया। प्रदर्शन का एक हिस्सा सरकार की आर्थिक नीतियों और सामाजिक असमानता से भी नाराज था। इस तरह स्कूलों में सुधार की मांग से शुरू हुआ विरोध व्यापक आर्थिक और सामाजिक आंदोलन में बदल गया।

France Protest: पुलिस कार्रवाई और 15 साल के छात्र की चोट से बढ़ा गुस्सा

प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई भी आंदोलन का बड़ा मुद्दा बन गई। 5 अक्टूबर को उत्तरी फ्रांस के लेंस शहर में पुलिस के ग्रेनेड से 15 साल के एक छात्र का हाथ गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसे काटना पड़ा। घटना के हालात और जिम्मेदारी को लेकर जांच की खबरें सामने आईं। इससे पहले भी प्रदर्शनों के दौरान छात्रों के घायल होने की घटनाएं हुई थीं। इन घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी बढ़ी। प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने बल प्रयोग पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन ने हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

आगजनी, लूटपाट और हजारों गिरफ्तारियों का मामला

17 अक्टूबर के प्रदर्शनों के दौरान पेरिस, मार्सिले, लियोन और अन्य शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ तथा दुकानों में लूटपाट की घटनाएं हुईं। मार्सिले में प्रदर्शनकारियों का एक समूह नगर निगम भवन के अंदर पहुंच गया, जबकि लियोन में एक पर्यटन कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी हुई। लिमोज में ऐतिहासिक नगर भवन को भी आग से नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई। 17 अक्टूबर के प्रदर्शनों में अधिकारियों ने 1,200 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी और करीब 150 पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी दी। वहीं, सितंबर के अंत से अक्टूबर के शुरुआती दिनों तक चले स्कूल आंदोलन के दौरान 6,000 से अधिक गिरफ्तारियों का अलग आंकड़ा सामने आया था। इन दोनों आंकड़ों को एक ही घटना का आंकड़ा नहीं समझना चाहिए।

France Protest: मैक्रों सरकार के सामने बढ़ी चुनौती

फ्रांस में विरोध प्रदर्शन ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू की सरकार के सामने कानून-व्यवस्था के साथ आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां भी खड़ी की हैं। सरकार ने हिंसा, आगजनी और लूटपाट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों की मांगों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, महंगाई से राहत, बेहतर वेतन और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करना शामिल है। फ्रांस में 2027 में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं, ऐसे में देशव्यापी असंतोष का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है। आंदोलन की आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और हिंसा रोकने के लिए किस तरह की रणनीति अपनाती है।

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