Nandlal Rai: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नंदलाल राय उर्फ बबलू राय का मामला चर्चा में है। वाराणसी में हुए प्रमोद कुमार निगम हत्याकांड में अप्रैल 2025 में उम्रकैद की सजा पाने वाले नंदलाल राय को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने उनकी दोषसिद्धि और सजा पर अपील लंबित रहने तक रोक लगाते हुए जमानत मंजूर की। नंदलाल के वकील ने अदालत में कहा कि वह पहले बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता थे और अब 2027 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय या संभव होने पर बीजेपी के टिकट पर लड़ना चाहते हैं।
कौन हैं नंदलाल राय उर्फ बबलू राय?
नंदलाल राय को बबलू राय के नाम से भी जाना जाता है। वह मूल रूप से गाजीपुर जिले के करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के जोगा मुसाहिब गांव के निवासी बताए गए हैं। मीडिया रिपोर्टों में उनका संबंध माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी के गिरोह से भी बताया गया है। हालांकि, उनकी राजनीतिक पहचान और मौजूदा चुनावी महत्वाकांक्षा के संबंध में हाईकोर्ट में उनके वकील की ओर से दी गई दलीलें महत्वपूर्ण हैं।
Nandlal Rai: क्या था प्रमोद निगम हत्याकांड?
यह मामला वाराणसी के व्यापारी प्रमोद कुमार निगम की हत्या से जुड़ा है। रिपोर्टों के मुताबिक, 17 जनवरी 2017 को जवाहर मार्केट में पेशाब करने से रोकने को लेकर विवाद हुआ था। बताया गया कि विवाद के दौरान प्रमोद निगम ने नंदलाल को थप्पड़ मारे थे। इसके बाद नंदलाल पर पिस्टल से गोली चलाकर उनकी हत्या करने का आरोप लगा। मामले में शेषनाथ शर्मा का नाम भी सामने आया। प्रमोद निगम राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे थे और राष्ट्रीय फेरी-पटरी ठेला व्यवसायी संगठन के संस्थापक थे।
2025 में अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद
वाराणसी की अदालत ने अप्रैल 2025 में प्रमोद निगम हत्याकांड में नंदलाल राय और शेषनाथ शर्मा को दोषी ठहराते हुए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। रिपोर्ट के अनुसार, नंदलाल पर 60 हजार रुपये और शेषनाथ पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इसके बाद नंदलाल ने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर की। इसी अपील के लंबित रहने के दौरान उन्होंने हाईकोर्ट से राहत मांगी।
Nandlal Rai: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सजा पर रोक क्यों लगाई?
नंदलाल राय की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने 5 अक्टूबर 2026 को आदेश दिया। अदालत ने अपील का अंतिम फैसला आने तक उनकी दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी तथा जमानत मंजूर की। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि अभियोजन का मामला काफी हद तक परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था। वकीलों ने जांच में नंदलाल का नाम सामने आने में देरी, चश्मदीदों के बयानों और कथित हत्या के हथियार की बरामदगी पर भी सवाल उठाए। अदालत ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद राहत दी।
चुनाव लड़ने की इच्छा ने क्यों खींचा ध्यान?
हाईकोर्ट में नंदलाल राय के वकील ने बताया कि दोषी ठहराए जाने से पहले वह बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता थे। उनकी इच्छा 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने की है। वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में या संभव होने पर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आम नागरिक की आजीविका का अधिकार भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, बीजेपी से टिकट मिलने की कोई घोषणा नहीं हुई है।
Nandlal Rai: क्या अब चुनाव लड़ सकेंगे नंदलाल राय?
जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत दो साल या उससे अधिक की कैद की सजा पाने वाले व्यक्ति को चुनाव लड़ने से अयोग्यता का सामना करना पड़ता है। हालांकि, अपीलीय अदालत द्वारा दोषसिद्धि पर रोक लगाए जाने से इस अयोग्यता पर असर पड़ सकता है। नंदलाल राय के मामले में हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा दोनों पर रोक लगाई है, जिससे चुनाव लड़ने की उनकी राह में मौजूद कानूनी बाधा दूर हो सकती है। लेकिन इससे उनकी दोषसिद्धि स्थायी रूप से खत्म नहीं हुई है और न ही चुनाव लड़ने या बीजेपी का टिकट मिलने की गारंटी मिलती है। उनकी अपील पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
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