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Dussehra: राम सदैव पूजनीय रहेंगे, जलाया जाता रहेगा रावण 

Dussehra: राम सदैव पूजनीय रहेंगे, जलाया जाता रहेगा रावण 
Dussehra: राम सदैव पूजनीय रहेंगे, जलाया जाता रहेगा रावण 
Dussehra: विजयदशमी के अवसर पर हर साल लोग रावण के पुतले जलाते हैं।रावण के पास जीवन में किसी चीज की कमी नहीं थी, वह सोने की लंका का राजा था।महाबली था। उसने कैलाश पर्वत को हिला दिया था। उसके पुत्र मेघनाद ने तो स्वर्गाधिपति इंद्र को भी जीत लिया था।रावण प्रकांड विद्वान था, वेदों का ज्ञाता होने के साथ ही महाशिवभक्त भी था। शिव तांडव स्तोत्र का वह रचयिता था। इसके बावजूद उसमें कुछ दुर्गुण ऐसे थे जिनके कारण वह अपना सर्वनाश करा बैठा।वह लोभी, क्रोधी, अहंकारी और वासना से ग्रसित था। यही कारण है कि हर साल बुराई के प्रतीक के तौर पर उसका पुतला जलाए जाने की परंपरा चली आ रही है।
मर्यादा में बने रहें
रावण के पास सब कुछ था, लेकिन वासना और अंहकार के वशीभूत होकर उसने भाई कुबेर का राज हड़प लिया, तो दूसरे भाई विभीषण को लंका से निकाल दिया। अहंकार के कारण उसने किसी की अच्छी सलाह नहीं मानी, तो उसके पास कुछ नहीं बचा। अहंकार जीवन का ऐसा शत्रु है जिसके कारण व्यक्ति के तमाम अच्छे गुणों का भी कोई महत्व नहीं रह जाता है। एक तरफ अहंकारी रावण का चरित्र है, तो दूसरी ओर शांत, धैर्यवान, दयालु और विनम्र मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम हैं, जिन्होंने समाज को सत्य, धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलना सिखाया। उन्होंने रावण की तरह अपने भाई का राज नहीं हड़पा, बल्कि पिता दशरथ के वचन की रक्षा के लिए बिना किसी संकोच के राजपाठ त्यागकर चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया। राम के पास ज्ञान और शक्ति थी, लेकिन उनके जीवन में अहंकार के लिए कोई स्थान नहीं था। राम ने अपने ज्ञान का उपयोग आदर्श समाज के निर्माण में किया, तो रावण ने सदैव अपने ज्ञान का दुरुपयोग किया। 

Dussehra: त्याग और विनम्रता को अपनाएं

राम त्याग और विनम्रता की मूर्ति हैं। उन्होंने सौतेली मां के कहने पर अयोध्या का साम्राज्य छोड़ दिया और वन को चले गए।भाई भरत को बड़े स्नेह से समझाया कि प्रजा को हमेशा खुश रखना। प्रजा का उनके लिए बहुत बड़ा महत्व था।यही वजह है कि जब वे वनवास से लौटे तो प्रजा ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। राम ने जनता को इतना स्नेह दिया कि ‘राजराज’ को सबसे अच्छा माना गया है।जो भी राजनेता अपने जीवन में उनके गुणों को धारण करेगा, वह जनता में लोकप्रिय बना रहेगा। आम आदमी भी भगवान राम के गुणों को अपनाएं तो जीवन सार्थक हो जाएगा। राम हमेशा हर इंसान के हृदय में बसे रहेंगे। उनकी सदैव पूजा होती रहेगी और अंहकारी रावण को हमेशा जलाया जाता रहेगा।राम अच्छाई तो रावण बुराई का प्रतीक है। समाज अच्छाइयों को ही स्वीकार करता है, जबकि बुराई को हमेशा तिरस्कार ही मिलता है।