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Dussehra: रावण की ऊंचाई बढ़ भी रही और घट भी रही, जानिए क्यों?

Dussehra: रावण की ऊंचाई बढ़ भी रही और घट भी रही, जानिए क्यों?
Dussehra: रावण की ऊंचाई बढ़ भी रही और घट भी रही, जानिए क्यों?

Dussehra: विजयदशमी पर हर साल रावण के पुतले जलाए जाते हैं। खास बात यह है कि एक ओर जहां महानगरों और बड़े शहरों में साल-दर-साल रावण के पुतले की ऊंचाई बढ़ती जा रही, वहीं कई छोटे शहरों और कस्बों में निरतंर रावण की ऊंचाई घट रही है। रावण के पुतले बनाने वाले कारीगर बताते कि रावण के पुतले को लेकर इतना आकर्षण है कि वर्ष 1985 में दिल्ली में जहां सबसे ऊंचा पुतला करीब 200 फीट का बनाया गया था, वहीं इस साल 2026 में दिल्ली के द्वारका में 221 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। बताया जाता है कि लगभग 22 मंजिला इमारत के बराबर ऊंचे इस पुतले को 120 कारीगरों ने करीब 3 महीने में तैयार किया है। इसे बनाने में लगभग 7 टन लोहे का इस्तेमाल हुआ है। दिल्ली के अलावा हरियाणा के पंचकूला में भी 221 फीट ऊंचे पुतले का दहन होगा।पिछले साल यानी 2025 में 215 फीट और उससे पहले 211 फीट के आस-पास के पुतले बनाए गए थे।

छोटे शहरों में क्यों छोटा हो रहा रावण?

जहां एक ओर महानगरों में रावण के पुतले की ऊंचाई बढ़ रही है, वहीं कई छोटे शहरों और कस्बों में बढ़ती महंगाई और बजट की कमी के कारण रावण के पुतले की ऊंचाई घट रही है। छोटे शहरों और कस्बों में पहले जो पुतले 50-60 फीट ऊंचे हुआ करते थे,  उनकी ऊंचाई घटकर अब  20 से 30 फीट के करीब रह गई है। उदाहरण के तौर पर यूपी के बरेली में कभी 40-50 फीट ऊंचा पुतला बनता था, लेकिन इस बार 20-20 फीट के पुतले बनाए गए हैं। बरेली में पुतले बनाने वाले पुश्तैनी कारीगरों के अनुसार इस साल सिर्फ 20-20  फीट ऊंचे पुतले  बनाने के ऑर्डर मिले हैं। रावण का कद घटने के साथ ही उनकी कमाई भी घट रही है।कारीगरों के मुताबिक बांस की बल्लियों से लेकर मेहनताना तक का खर्च बढ़ गया है, इसीलिए अब पहले जैसे ऑर्डर नहीं मिल पा रहे हैं। उनका कहना है कि यूपी के ज्यादातर जिलों में रावण के पुतले छोटे होते जा रहे हैं। 

Dussehra: कॉकरोच का पुतला बना विशेष आकर्षण
इस बार दिल्ली की श्री केशव रामलीला समिति पीतमपुरा ने गंदगी के प्रतीक के रूप में 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी रावण के साथ फूंकने का निर्णय लिया है। आयोजक इसे पूरी तरह गैर-राजनीतिक और केवल सफाई से जुड़ा बता रहे हैं। आयोजकों के मुताबिक कॉकरोच को गंदगी, मैल और अस्वच्छता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इसका पुतला जलाया जा रहा है, लेकिन चूँकि इस बार संयोग से पुतला दहन का समय ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध- प्रदर्शनों के साथ पड़ रहा है, इसलिए सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देख रहे हैं।