Aligarh News: अलीगढ़ के थाना लोधा क्षेत्र स्थित प्राचीन खेरेश्वर धाम मंदिर में हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य मेला लगता है, जिसमें सभी समुदायों के दुकानदार वर्षों से अपनी दुकानें लगाते रहे हैं। लेकिन इस बार मंदिर कमेटी ने बड़ा फैसला लेते हुए मेले में दुकानें धर्म देखकर आवंटित करने का निर्णय लिया है।मंदिर परिसर में जारी पोस्टर में साफ लिखा गया है कि मुस्लिम समुदाय के दुकानदारों को अब मंदिर परिसर में दुकान लगाने की अनुमति नहीं होगी। पोस्टर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर से लेकर सोशल मीडिया तक इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
15 फरवरी की घटना के बाद लिया गया फैसला
बताया जा रहा है कि 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि के मेले के दौरान एक मुस्लिम दुकानदार अरमान द्वारा महिलाओं के अंडरगारमेंट्स की दुकान लगाने पर विवाद खड़ा हो गया था।
करणी सेना से जुड़े सचिन राघव और उनके समर्थकों ने इसका विरोध किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ गया।
आरोप है कि सचिन राघव ने मंदिर के खोया-पाया केंद्र में जाकर माइक छीन लिया और उसी से दुकान का विरोध करना शुरू कर दिया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
Aligarh News: हंगामा, गिरफ्तारी और कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन
मामले में मंदिर कमेटी के कार्यकर्ताओं और करणी सेना के सदस्यों के बीच कहासुनी भी हुई। पुलिस ने शांति भंग की आशंका में सचिन राघव सहित कई लोगों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।इसके बाद करणी सेना के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया और मांग उठाई कि मंदिर परिसर में मुस्लिम दुकानदारों को दुकान देने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।इसी दबाव के बाद मंदिर कमेटी ने नया पोस्टर जारी कर मुस्लिम दुकानदारों पर रोक का ऐलान कर दिया।
Aligarh News: पहले भी हो चुका है विवाद
खेरेश्वर धाम मंदिर में धर्म से जुड़ा विवाद पहली बार नहीं हुआ है। करीब पांच वर्ष पहले बसपा नेता सलमान शाहिद द्वारा मंदिर परिसर में वाटर कूलर लगवाने पर भी विवाद हुआ था।
हिंदूवादी संगठनों ने उनके नाम की शिलापटिका तोड़ दी थी और बाद में मंदिर कमेटी ने वाटर कूलर भी वापस कर दिया था।श्री खेरेश्वर महादेव मंदिर परिषद के अध्यक्ष गजराज सिंह ने बताया कि शिवरात्रि के दिन दुकानों को लेकर कुछ लोगों ने हंगामा किया था।उनके मुताबिक, करणी सेना का आरोप था कि मंदिर परिसर में मुस्लिम युवक द्वारा महिलाओं के अंडरगारमेंट्स बेचे जा रहे थे, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुईं।इसी को देखते हुए मंदिर कमेटी ने “सनातन हिंदू प्रेमियों की भावनाओं” का हवाला देते हुए पोस्टर चस्पा किए हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लोगों की दुकानें न लगाने की बात लिखी गई है।
सोशल मीडिया पर तेज बहस
मंदिर कमेटी के इस फैसले के बाद मामला अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है।जहां कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा निर्णय बता रहे हैं, वहीं कई लोग धर्म के आधार पर दुकानों पर रोक को लेकर सवाल उठा रहे हैं।फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन अलीगढ़ में यह मुद्दा सियासी और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया है।






