Ashutosh Ranka Sourav Das: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास ने अपनी न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका दिल्ली हाई कोर्ट से वापस ले ली है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों नेताओं के वकीलों को सुझाव दिया कि वे पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में होने वाली सुनवाई का इंतजार करें। इसके बाद उनके वकीलों ने अदालत का सुझाव स्वीकार करते हुए याचिका वापस ले ली। हाई कोर्ट ने कहा कि यदि स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की सुनवाई के बाद भी दोनों को न्यायिक हिरासत में रखा जाता है, तो वे सीधे हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करने के बजाय सेशन कोर्ट में अपील कर सकते हैं। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी।
Ashutosh Ranka Sourav Das: सेशन कोर्ट में अपील करने का मिला सुझाव-
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने आशुतोष रांका और सौरव दास के वकीलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ने का सुझाव दिया। अदालत ने कहा कि उन्हें पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने होने वाली सुनवाई का इंतजार करना चाहिए। अदालत के मुताबिक, यदि इसके बाद भी दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत जारी रहती है, तो वे सेशन कोर्ट में अपील कर सकते हैं। अपील के दौरान वकील मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर अपनी दलीलें रख सकते हैं, जबकि रिट याचिका में मुख्य रूप से यह देखा जाता है कि संबंधित फैसला लेने की प्रक्रिया उचित थी या नहीं। इसके बाद दोनों नेताओं के वकीलों ने याचिका वापस ले ली।
Ashutosh Ranka Sourav Das: दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी न्यायिक हिरासत-
इससे पहले, स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट रितु राज की अदालत ने 19 अक्टूबर को आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाने का आदेश दिया था। अदालत ने हिरासत बढ़ाने के पीछे दो प्रमुख कारण बताए थे। पहला, दोनों के पिछले आचरण और कानून के प्रति कथित अनादर के कारण शांति भंग होने की आशंका। दूसरा, उनकी ओर से पेश किए गए जमानतियों का अयोग्य पाया जाना। इसके बाद दोनों नेताओं के वकीलों ने दिल्ली हाई कोर्ट में आदेश को चुनौती दी थी। CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मामले में जल्द सुनवाई की मांग करने की बात कही थी।
अभिजीत दीपके को मिल चुकी है रिहाई-
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को शनिवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत से रिहाई मिल गई थी। उन्हें 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले उस स्थान से हिरासत में लिया गया था, जहां वह ठहरे हुए थे।इस मामले में दीपके, रांका और दास को पहले भी हिरासत में लिया गया था। हालांकि, बाद में तीनों को शांति बनाए रखने के लिए निजी मुचलका और जमानती बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया गया था।
10 अक्टूबर को हुई थी गिरफ्तारी-

इस पूरे मामले की शुरुआत 10 अक्टूबर को हुई थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, CJP के नेताओं ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति के बिना सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से शामिल होने की अपील की थी। पुलिस ने आशंका जताई थी कि प्रस्तावित प्रदर्शन से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसी आधार पर पुलिस ने 10 अक्टूबर को अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया था। अगले दिन, 11 अक्टूबर को तीनों को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। वहां उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 136 के तहत 50,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानती बॉन्ड पर एक साल तक शांति बनाए रखने का वादा किया। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
क्या होता है पीस बॉन्ड-
पीस बॉन्ड एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी व्यक्ति से निर्धारित अवधि तक शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली गतिविधियों से दूर रहने का वादा लिया जाता है। इसका उद्देश्य संभावित विवाद या शांति भंग होने की आशंका को रोकना होता है।
मुचलके के उल्लंघन का पुलिस ने लगाया आरोप-
दिल्ली पुलिस का दावा है कि रिहा होने के बाद इन नेताओं ने दोबारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान करना शुरू कर दिया था। मामले के शिकायतकर्ता सब-इंस्पेक्टर मोहित भाटी ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत को बताया था कि 13 अक्टूबर की सुबह आशुतोष रांका और सौरव दास जेडीयू कार्यालय परिसर के अंदर से कूदकर जंतर-मंतर पहुंचे और वहां नारेबाजी करते हुए हंगामा करने लगे। पुलिस के आरोपों के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की गई। हालांकि, ये आरोप पुलिस की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें अदालत में साबित किया जाना अलग प्रक्रिया है।
अदालत ने पहले की सुनवाई में की थीं सख्त टिप्पणियां-
14 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट महेश कुमार मीना द्वारा पारित पहले रिमांड आदेश में दोनों नेताओं के आचरण को लेकर सख्त टिप्पणियां की गई थीं। आदेश में कहा गया था कि दोनों का व्यवहार अड़ियल और आक्रामक दिखाई देता है तथा उनमें पछतावे के संकेत नहीं दिख रहे हैं। आदेश में यह भी कहा गया था कि उनका पिछला आचरण अधिकारियों के वैध निर्देशों का उल्लंघन करने और आम जनता को अवैध विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित करने की आशंका दर्शाता है। इन टिप्पणियों और शांति भंग होने की आशंका का हवाला देते हुए अदालत ने BNSS की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया था और दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
अब आगे क्या होगा-
दिल्ली हाई कोर्ट से याचिका वापस लिए जाने के बाद आशुतोष रांका और सौरव दास के मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत की सुनवाई और उसके आदेश पर निर्भर करेगी। हाई कोर्ट ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई फैसला नहीं दिया है। अदालत ने केवल दोनों नेताओं को कानूनी प्रक्रिया के तहत सेशन कोर्ट में अपील करने का विकल्प सुझाया है। ऐसे में उनकी हिरासत को लेकर आगे की स्थिति संबंधित अदालतों के आदेशों से स्पष्ट होगी।
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