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पोस्टर में पनीर, प्लेट में आलू! रेखा गुप्ता अटल कैंटीन के नाम पर करा रही बड़ा खेल, ग्राउंड रिपोर्ट में लोगों ने खोली सरकारी दावों की पोल

atal canteen exposed

Atal Canteen: अटल कैंटीन- ये नाम सुनते ही जहन में जो सबसे पहली बात आती है, वो है ₹5 में भरपेट खाना। लेकिन इस दावे में कितनी सच्चाई है? क्या वाकई दिल्लीवासियों को रेखा गुप्ता सरकार की ओर से ₹5 में भरपेट भोजन मिल रहा है, या फिर ये बातें सिर्फ सोशल मीडिया और प्रचार तक ही सीमित हैं? इसी सवाल का जवाब जानने के लिए जब खबर इंडिया की टीम आनंद विहार के पास स्थित अटल कैंटीन में पहुंची तो वहां की स्थिति सरकार द्वार किए गए दावों से विपरीत देखने को मिली।

जिसके बाद खबर इंडिया के रिपोर्टर हिमांशु गर्ग ने अटल कैंटीन के अंदर जाकर लोगों से बातचीत की और भोजन व्यवस्था का जायजा लिया, तो कई ऐसी बातें सामने आईं, जिन्होंने सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। वो कहावत है ना- हाथी के दांत खाने के और, दिखने के और, ठीक आनंद विहार की अटल कैंटीन में सामने आई तस्वीरें और लोगों की शिकायतें कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही थी।

भरपेट खाने के दावे पर सवाल?

अटल कैंटीन की शुरुआत के दौरान सरकार की ओर से यह दावा किया गया था कि जरूरतमंद लोगों को महज ₹5 में भरपेट भोजन दिया जाएगा। साथ ही कहा गया था कि अगर किसी जरूरतमंद के पास ₹5 भी नहीं हैं, तो वह बिना पैसे के भी भोजन कर सकता है। लेकिन ग्राउंड पर मौजूद कुछ लोगों का कहना था कि उन्हें उतना खाना नहीं मिल पा रहा, जिससे उनका पेट भर सके। कैंटीन में खाना खाने पहुंचे एक मजदूर ने बताया कि भोजन की मात्रा कम पड़ने पर जब वह दोबारा रोटी मांगते हैं, तो उन्हें कर्मचारियों से अनुरोध करना पड़ता है। उनका कहना था कि मजदूरी करने वाले व्यक्ति के लिए चार रोटी से पेट भरना मुश्किल है। जबकि एक अन्य व्यक्ति ने भोजन की मात्रा को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि खाने में अब पहले जैसा स्वाद नहीं है। लोगों की शिकायतों के मुताबिक, दोबारा खाना लेने में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान कुछ लोगों ने कैंटीन में परोसे जा रहे भोजन को लेकर भी सवाल उठाए। भोजन कर रहे लोगों का कहना था कि सरकार की ओर से प्रचारित तस्वीरों और पोस्टरों में जिस तरह का खाना दिखाया गया है, थाली में वैसा भोजन परोसा नहीं जा रहा। कुछ लोगों ने दावा किया कि प्रचार सामग्री में पनीर की सब्जी दिखाई गई, जबकि कैंटीन में उन्हें आलू की सब्जी परोसी जा रही है।

Atal Canteen: कितना मिलता है खाना?

आपको बता दें कि अटल कैंटीन का उद्देश्य गरीब, मजदूर और जरूरतमंद लोगों को सस्ता और पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ₹5 में मिलने वाला भोजन वास्तव में ‘भरपेट’ है? अगर लोगों को दूसरी बार रोटी या भोजन लेने के लिए कर्मचारियों से बार-बार गुजारिश करनी पड़ रही है, तो सरकार के सामने इस व्यवस्था की समीक्षा करने का सवाल खड़ा होता है। दूसरी तरफ, अगर कैंटीन के नियमों में भोजन की मात्रा निर्धारित है, तो सरकार और कैंटीन प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि एक व्यक्ति को कितनी मात्रा में भोजन दिया जाना है और क्या जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त रोटी या भोजन उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था है।

ग्राउंड पर लोगों की आवाज सबसे अहम

सरकार की किसी भी योजना का असली पैमाना उसके विज्ञापन या पोस्टर नहीं, बल्कि उसका जमीन पर होने वाला असर होता है। अटल कैंटीन योजना का उद्देश्य अगर जरूरतमंदों को सस्ता और भरपेट भोजन उपलब्ध कराना है, तो लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। खबर इंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट सरकार के सामने यही सवाल खड़ा करती है क्या अटल कैंटीन में ₹5 में वाकई भरपेट खाना मिल रहा है? क्या जरूरतमंदों को पर्याप्त मात्रा में भोजन मिल रहा है? और अगर लोग दोबारा रोटी मांग रहे हैं, तो उन्हें पर्याप्त भोजन देने की व्यवस्था क्यों नहीं है? इन सवालों का जवाब दिल्ली सरकार को देना चाहिए, ताकि ₹5 में भरपेट भोजन का दावा सिर्फ प्रचार नहीं, बल्कि जमीन पर भी दिखाई दे।

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