Babri Masjid: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद कुछ लोगों ने यह कहते हुए सवाल उठाया था कि यदि इसके स्थान पर सरकार अस्पताल या स्कूल बनवाती तो यह ज़्यादा बेहतर होता। लेकिन अब पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखे जाने पर वही लोग चुप नज़र आ रहे हैं। दरअसल, हाल ही में टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी, जिसके बाद राजनीति से लेकर आम जनता के बीच इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई। एक पक्ष इसका समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसका विरोध करता दिख रहा है। इसी क्रम में मध्य प्रदेश के अशोकनगर ज़िले में एक भाजपा नेता ने अनोखे तरीके से विरोध जताते हुए बाबरी नाम से एक सार्वजनिक शौचालय बनवा दिया। जिसका फोटो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।
शौचालय की बाहरी दीवारों पर लगे बाबर शौचालय के पोस्टर
उधर, इस फैसले को लेकर मध्य प्रदेश के अशोकनगर में विरोध एक अलग ही अंदाज़ में सामने आ रहा है। यहां स्थानीय बीजेपी नेताओं ने नगर परिषद के एक सार्वजनिक शौचालय का नाम बदलकर “बाबर शौचालय” कर दिया है। नामकरण के बाद यह मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है। शौचालय की बाहरी दीवारों पर “बाबर शौचालय” के पोस्टर भी चिपकाए गए हैं। यह शौचालय बाइपास रोड पर स्थित तुलसी सरोवर पार्क के पास बनाया गया है।

इसी दौरान किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष बबलू यादव ने बताया कि बाबर को लेकर उनकी नाराज़गी ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित है। बाबर एक आक्रमणकारी शासक था, जिसने अपने शासनकाल में कई हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुंचाया और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक शौचालय का यह नामकरण उसी प्रतीकात्मक विरोध का हिस्सा है, जिसके माध्यम से वे अपनी ऐतिहासिक असहमति व्यक्त कर रहे हैं।
Babri Masjid: छह दिसंबर को रखी बाबरी की नींव
गौरलतब है कि छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद की बरसी वाले दिन हुमायूं कबीर ने बेलडंगा में एक बाबरी मस्जिद की नींव रखी थी। इसके पीछे उन्होंने बताया था कि यह कदम मुसलमानों की भावना के सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत लिया गया है। खुद कबीर का कहना है कि मैंने किसी के खिलाफ कुछ नहीं किया। जहां मंदिर-मस्जिद बनते हैं, वहां बाबरी नाम रखने में दिक्कत क्यों?
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