Breaking News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में व्यापारिक नीति ने कई देशों को प्रभावित किया। भारत जैसे बड़े ट्रेडिंग पार्टनर पर भी टैरिफ का खतरा मंडरा रहा। अगर भारत ने रूस और ईरान के साथ तेल और व्यापारिक संबंध बनाए रखे, तो अमेरिका टैरिफ को बढ़ाकर 575% तक पहुंचा सकता था। ऐसे दबावों के बीच भारत ने अपनी व्यापार रणनीति को नए सिरे से तैयार किया और अमेरिका पर निर्भरता कम करते हुए दुनिया के अन्य बाजारों की ओर रुख किया।
Breaking News: भारत की नई राह: विविधता और अवसर
भारत ने पश्चिम एशिया, अफ्रीका, यूरोप और चीन जैसे गैर-अमेरिकी बाजारों में नई संभावनाएं तलाशनी शुरू की। दिसंबर में चीन को निर्यात में 67% की वृद्धि देखी गई, जबकि अमेरिका को निर्यात में मामूली गिरावट 1.8% रही। यह साफ दर्शाता है कि भारत ने अमेरिकी दबाव के बावजूद अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत और संतुलित बनाने का रास्ता चुना।
Breaking News: वैश्विक साझेदारी में मजबूती
भारत ने UAE, ऑस्ट्रेलिया, ओमान, UK और यूरोपियन यूनियन के साथ फ्री ट्रेड और आर्थिक साझेदारी समझौते किए हैं। विशेष रूप से UK के साथ हुए समझौते के तहत भारत के 99% उत्पाद ब्रिटेन के बाजारों में बिना टैरिफ के प्रवेश करेंगे, जबकि भारत में ब्रिटेन के 99% उत्पाद मामूली 3% टैरिफ पर आयात किए जा सकेंगे।
लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में विस्तार
भारत ने लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के बाजारों में भी अपनी पकड़ मजबूत की है। ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव के समय भारत खुद को एक वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग और सोर्सिंग हब के रूप में पेश कर रहा है, जिससे देश की आर्थिक सुरक्षा और व्यापारिक अवसर दोनों बढ़ रहे हैं। ट्रंप के टैरिफ और व्यापारिक दबाव ने भारत को मजबूर किया, लेकिन देश ने इसे अवसर में बदलते हुए अपनी वैश्विक व्यापार रणनीति को मजबूत किया। अब भारत अमेरिका के अलावा कई नए बाजारों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और ग्लोबल व्यापार में खुद को एक स्थिर और भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रहा है।
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