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लेख छपवाने का लालच देकर चीनी जासूसों ने सेना के अफसर की पत्नी को फंसाया, खुफिया जानकारी लेने का आरोप

Chinese Spies:

Chinese Spies: जम्मू में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक संवेदनशील मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। एक वरिष्ठ सेना अधिकारी की पत्नी पर आरोप है कि उसने कुछ ऐसे लोगों के साथ संवेदनशील जानकारियां साझा कीं, जो खुद को अकादमिक जगत और शोध से जुड़ा बता रहे थे। शुरुआती जांच में इन लोगों के चीन से जुड़े खुफिया नेटवर्क का हिस्सा होने का संदेह जताया गया है। आरोप है कि महिला को लेख प्रकाशित कराने का लालच देकर संपर्क किया गया और धीरे-धीरे उससे रक्षा तथा रणनीतिक महत्व से जुड़ी जानकारियां हासिल करने की कोशिश की गई।

Chinese Spies: सेना के अफसर की पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज-

जम्मू पुलिस ने इस मामले में सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी के खिलाफ केस दर्ज किया है। महिला मूल रूप से तेलंगाना की रहने वाली है और फिलहाल जम्मू के गांधी नगर थाना क्षेत्र में रह रही है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों की शुरुआती जांच के मुताबिक, कुछ संदिग्ध चीनी ऑपरेटिव्स ने खुद को शिक्षाविद और शोधकर्ता बताकर महिला से संपर्क किया था। शुरुआत में पर्यावरण और भू-राजनीति जैसे विषयों पर लेख लिखने को लेकर बातचीत हुई। आरोप है कि बाद में बातचीत का दायरा रक्षा और रणनीतिक महत्व से जुड़े संवेदनशील मुद्दों तक पहुंच गया।

Chinese Spies: ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट समेत कई धाराओं में FIR-

इस मामले में गांधी नगर थाने में FIR संख्या 290/2026 दर्ज की गई है। महिला के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 की धारा 3 और 5 के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट की धारा 3 राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली सूचनाओं के संग्रह और संचार से संबंधित है, जबकि धारा 5 संरक्षित सूचनाओं को गलत तरीके से साझा करने और संभालने से जुड़ी है। मामले की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित तौर पर कौन-सी जानकारियां साझा की गईं और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।

संवेदनशील दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा साझा करने का संदेह-

सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों को एक विश्वसनीय स्रोत से जानकारी मिली थी कि महिला के पास देश की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं, दस्तावेज, तस्वीरें और इलेक्ट्रॉनिक डेटा होने की आशंका है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि ऐसी जानकारियां एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन चैनलों के जरिए विदेशों में मौजूद कुछ लोगों तक पहुंचाई जा रही थीं। इन लोगों के विदेशी खुफिया एजेंसियों से जुड़े होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कथित तौर पर कौन-कौन से दस्तावेज या जानकारियां साझा की गईं और उनका राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से कितना महत्व था।

क्या है ‘इंटेलेक्चुअल ट्रैप’, जिसके जरिए महिला को फंसाने का आरोप-

जांचकर्ताओं का मानना है कि महिला संभवतः एक तरह के ‘इंटेलेक्चुअल ट्रैप’ का शिकार हुई। इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति से अकादमिक गतिविधियों, शोध या लेखन के बहाने संपर्क स्थापित करना और धीरे-धीरे उससे संवेदनशील जानकारियां हासिल करने की कोशिश करना। आरोप है कि संदिग्ध लोगों ने शुरुआत में महिला को पर्यावरण और भू-राजनीति जैसे विषयों पर लेख लिखने का अवसर दिया। इसके बाद बातचीत को धीरे-धीरे रक्षा और रणनीतिक मामलों की ओर बढ़ाया गया। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि महिला ने किन लोगों से संपर्क किया, उनके बीच किस तरह की बातचीत हुई और क्या वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां साझा की गईं। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है।

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