Crude oil: मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी दी है कि इस संघर्ष की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति में इतिहास का सबसे बड़ा संकट पैदा हो गया है। ईरान द्वारा खाड़ी देशों के ऊर्जा केंद्रों पर हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
1970 के दशक के संकट से भी बड़ी आपूर्ति बाधा
पेरिस स्थित IEA के मुताबिक, सिर्फ 13 दिनों के संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार में इतनी बड़ी बाधा पैदा कर दी है, जो 1970 के दशक के तेल संकट से भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है। कई खाड़ी देशों ने सुरक्षा चिंताओं के कारण तेल उत्पादन कम कर दिया है। वहीं होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में अब तक 40 से 50 प्रतिशत तक उछाल आ चुका है।
Crude oil: युद्ध खत्म होने के आसार नहीं
तनाव कम होने के फिलहाल कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। ईरान के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने चेतावनी दी है कि उनका देश लंबे युद्ध के लिए तैयार है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को “तबाह” कर सकता है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान को इस संघर्ष में नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सैन्य अभियान जल्द खत्म नहीं होगा।
Crude oil: पाकिस्तान में शुरू हुई मितव्ययिता
तेल संकट का असर पाकिस्तान में भी दिखने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने ईंधन बचाने के लिए कई अस्थायी कदम उठाए हैं। सरकारी वाहनों के लिए ईंधन आवंटन दो महीने के लिए 50 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है और लगभग 60 प्रतिशत सरकारी वाहन इस दौरान इस्तेमाल नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा संघीय मंत्रिमंडल के सदस्य, मंत्री और सलाहकार दो महीने तक वेतन नहीं लेंगे, जबकि सांसदों के वेतन में 25 प्रतिशत कटौती की जाएगी।
बांग्लादेश में भी ऊर्जा बचत के कड़े कदम
Crude oil: ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने भी सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ने बिजली और ईंधन की बचत के लिए देशभर के विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही रविवार से ईंधन राशनिंग भी लागू कर दी गई है, जिसके बाद पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगने लगी हैं। 17 करोड़ की आबादी वाला बांग्लादेश अपनी लगभग 95 प्रतिशत तेल और गैस की जरूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए वैश्विक संकट का असर वहां ज्यादा तेज़ी से दिख रहा है।
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