cyber crime with judge: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान खुलासा किया कि हाल ही में साइबर ठगों ने उन्हें भी निशाना बनाने की कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि उन्हें एक फर्जी ट्रैफिक चालान का मैसेज मिला था। मैसेज में दिए लिंक पर क्लिक करने पर वे एक ऐसी वेबसाइट पर पहुंचे, जो बिल्कुल सरकारी साइट जैसी दिख रही थी।
जज भी नहीं बचे सुरक्षित, आम लोगों का फिर क्या है हाल ?
जस्टिस शर्मा ने कहा कि वे समय रहते इस धोखाधड़ी को पहचानने में कामयाब रहे। लेकिन, अगर जजों को भी इस तरह के सुनियोजित फ्रॉड का शिकार बनाया जा रहा है, तो आम लोगों को और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने इस घटना का जिक्र साइबर फ्रॉड के बढ़ते खतरे को रेखांकित करने के लिए किया।
cyber crime with judge: अपराध को ऐसे दिया गया अंजाम
यह घटना जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के सामने आई, जो एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी ने दो पुलिस अधिकारियों के बैंक खातों में कुछ पैसे जमा किए और फिर उनसे धोखाधड़ी करने की कोशिश की। आरोपी ने पुलिसवालों को फंसाने के लिए फर्जी तरीके अपनाए थे। कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और उसे जेल में ही रखने का आदेश दिया।
cyber crime with judge: जस्टिस शर्मा ने जताई चिंता
जस्टिस शर्मा ने अपने साथ हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि साइबर अपराधी अब उच्च पदस्थ लोगों को भी टारगेट कर रहे हैं। फर्जी मैसेज और लिंक के जरिए लोग आसानी से पैसे गंवा सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी अनजान मैसेज या लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांच लें। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को जमानत नहीं दी और जांच को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
यह भी पढे़ : मुकुल रॉय को बड़ी राहत: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के अयोग्यता आदेश पर लगाई अंतरिम रोक







