Delhi News : देश में कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पर लगी अस्थायी रोक को सरकार ने हटा दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को जानकारी दी कि अब 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यावसायिक सिलेंडरों का वितरण दोबारा शुरू कर दिया गया है। सरकार ने 9 मार्च को कुछ समय के लिए कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई रोक दी थी, ताकि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी जा सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध भंडारण को रोकने के लिए देशभर में निगरानी बढ़ा दी गई है। कई राज्यों में छापेमारी की कार्रवाई तेज कर दी गई है।
Delhi से लेकर भोपाल तक LPG की किल्लत
अधिकारियों का कहना है कि अगर कहीं भी सिलेंडरों की जमाखोरी या काला बाजारी पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग में बड़ा उछाल देखा गया है। पहले जहां रोजाना करीब 55 लाख सिलेंडर बुक होते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 88 लाख तक पहुंच गई है। हालांकि तेल कंपनियां रोज करीब 50 लाख सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं, जिससे सप्लाई को संतुलित रखने की कोशिश की जा रही है।
तय किया गया अंतर
सप्लाई को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए सरकार ने सिलेंडर डिलीवरी के बीच एक निश्चित अंतराल तय किया है। नियम के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में दो सिलेंडरों की डिलीवरी के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर जरूरी होगा। वहीं ग्रामीण इलाकों में यह अवधि 45 दिन रखी गई है। इसका मकसद जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
ऊर्जा आयात पर भारत की निर्भरता
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। आंकड़ों के अनुसार देश अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है। इसके अलावा करीब 50 प्रतिशत गैस और लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी भी विदेशी बाजारों से आती है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर घरेलू ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ता है।
सरकार ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाए हैं। पहले एलपीजी उत्पादन में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी, जिसे बाद में 25 प्रतिशत तक बढ़ाया गया। अब इसे करीब 31 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि आयात पर निर्भरता कुछ कम की जा सके।
ईंधन का विकल्प
सरकार ने दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों, होटलों और रेस्टोरेंट को एक महीने के लिए वैकल्पिक ईंधन इस्तेमाल करने की अनुमति भी दी है। इसके तहत प्राकृतिक गैस की जगह बायोमास से बने पेलेट्स, खासकर रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) का इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह ईंधन नगर निगम और औद्योगिक कचरे से तैयार किया जाता है, जिसमें प्लास्टिक, कागज, कपड़ा और लकड़ी जैसे सूखे कचरे को प्रोसेस कर ऊर्जा के रूप में उपयोग किया जाता है।
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